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( iii ) विवाह के किसी पक्ष ने धर्मान्तरण करके अन्य धर्म को अपना लिया हो और हिंदू
न रहा हो_
( iv ) विवाह का कोई भी पक्ष विक्षिप्त मस्तिष्क के असाध्य रोग से ग्रस्त हो और इस
आवेदन से पहले लगातार कम से कम 5 वर्षों तक उसका इलाज चलता रहा हो_
और
( v ) कोई भी पक्ष असाध्य कुष्ठ रोग से पीडि़त हो_
( vi ) किसी भी पक्ष ने दूसरे पक्ष के विरुद्ध न्यायिक विच्छेद का आदेश अथवा
डिक्री होने के बाद दो या उससे अधिक समय तक वैवाहिक समागम स्थापित
न किया हो_
( vii ) किसी भी पक्ष में दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यावस्थान की डिक्री का दो वर्ष
या अधिक समय तक अनुपालन न किया गया हो।
(36)
(34) विवाह निष्प्रभावी करने का अधिकारः
(1) विवाह निष्प्रभावी करने की डिक्री विवाह के किसी भी पक्ष द्वारा अथवा अभिकर्त्ता
द्वारा अथवा विवाह से प्रभावित किसी व्यक्ति द्वारा अथवा व्यक्ति द्वारा जिसकी
इसमें रुचि हो, निष्प्रभावी होने के लिए आवेदन देकर डिक्री द्वारा अथवा किसी
अन्य कार्रवाई में उठाये गये तर्क के आधार पर प्राप्त की जा सकती है।
(2) विघटन के लिए अथवा विवाह-विच्छेद के लिए डिक्री का अधिकार केवल
वैवाहिक पक्ष के पास होगाः
इसके बाद भी कोई भी पक्ष राहत पाने के उद्देश्य से अपनी गलतियों अथवा
अयोग्यता का लाभ प्राप्त करने के योग्य नहीं होगा।
(37)
(35) अभिकर्ताओं की नियुक्तिः
(1) राज्य सरकार राज्य के लिए अथवा किसी भाग के लिए एक या अधिक अभिकर्ताओं
की नियुक्ति कर सकती है जिसके पास निम्न अधिकार होंगेःµ
( i ) वह किसी विवाह को निष्प्रभावी करने की किसी कार्यवाही में व्यक्तिगत
रूप से उपस्थित होना अथवा उसमें हस्तक्षेप करना, स्व-प्रेरणा से किसी भी