अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 407

392 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अथवा ऐसी कोई अपील निरस्त हो चुकी है अथवा ऐसे अपील के परिणामस्वरूप कोई विवाह विघटित हो जाता है तो यह संबंधित पक्षों के लिए विवाह पुनः करना विधिसंगत होगा मानो कि पूर्व विवाह मृत्यु के कारण विघटित हो गया हो।

(40)

(38) विवाह-विच्छेद का परिणामः

(1) जहां अकृतता की आज्ञप्ति से कोई विवाह-विच्छेद हो जाता है तो दोनों पक्ष

आपस में कभी विवाह हुआ नहीं मानेंगे और न ही कभी भी पति पत्नी के

रूप में संबंधित रहेंगेः

बशर्ते जहां कोई विवाह-विच्छेद अकृतता की डिक्री द्वारा इस आधार पर हो जाता

है कि पूर्व पत्नी या पति जीवित थे और यह विनिर्णीत हो जाता है कि परिवर्तित

विवाह परस्पर विश्वास पर हुआ था और एक या दोनों पक्षों को यह विश्वास हो

गया था कि पूर्व पत्नी या पति की मृत्यु हो चुकी है तो आज्ञप्ति जाने के पूर्व

पारित किये जन्म लिये बच्चे आज्ञप्ति में विर्निदिष्ट किये जायेंगे और हर तरह से

अपने माता-पिता की वैध संतान माने जायेंगे।

(2) जब कोई विवाह-विच्छेद विवाह विघटन की आज्ञप्ति से अथवा तलाक

के आज्ञप्ति से होता है तो दोनों पक्ष आज्ञप्ति दिये जाने की तिथि से पत्नी

और पति के रूप में एक-दूसरे से संबंधित नहीं रहेंगे और इस विवाह के

फलस्वरूप जन्म लिये बच्चे हर तरह से अपने माता-पिता की हमेशा वैध

संतान माने जाएंगे और आज्ञप्ति में उनके नामों का विशेष उल्लेख होगा।

(41)
क्षेत्राधिकार और कार्यविधि

(39) इस भाग के अन्तर्गत राहत दिए जाने की शक्तियों की सीमाः इस भाग में अन्तर्विष्ट कोई भी प्रावधान किसी भी न्यायालय को इन मामलों में प्राधिकृत नहीं करेगाःµ

(क) विवाह के अकृतता की आज्ञप्ति देना केवल उन्हीं मामलों को छोड़कर विवाह भारत में

ही संपन्न हुआ हो और आवेदन दिए जाने के समय आवेदक भारत का निवासी हो।

(ख) विवाह विघटन अथवा तलाक की आज्ञप्ति देना, केवल उन्हीं मामलों को छोड़कर

जिनमें विवाह के दोनों पक्ष आवेदन दिये जाने के समय भारत में ही रह रहे हों_

अथवा