अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 409

394 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(2) शून्य करार योग्य विवाह के मामलें में जो कि इस भाग के खंड (क) के

उपखंड (1) के अन्तर्गत न हों, और विवाह विघटन का आवेदन किये जाने

के समय जब तक विवाह के दोनों पक्ष प्रात में न रह रहे हों, अथवा

(ख) इस भाग के अन्तर्गत राहत देने के मामले में विवाह विघटन की आज्ञप्ति देने के

आलावा केवल उन मामलों को छोड़कर जिनमें आवेदक आवेदन दिए जाने के

समय प्रांत में रह रहा हो।

(40) न्यायालय जिसमें आवेदन दिया जाए और बंद कमरे में सुनवाईः

(1) इस भाग के अन्तर्गत कोई भी आवेदन जिला न्यायालय में दिया जाएगा जिसके

सामान्य मूल सिविल न्यायाधिकार की सीमा में विवाह संपन्न हुआ हो अथवा पति

व पत्नी साथ-साथ रहे हों।

(2) यदि कोई पक्ष चाहता हो अथवा यदि न्यायालय उचित समझती है तो इस भाग के

अ्रन्तर्गत सुनवाई बंद कमरे में होगी।

(43)

(41) विषय और आवेदनों की जांचः

(1) इस भाग के अन्तर्गत दिया गया प्रत्येक आवेदन, मामले का स्वभाव जिस प्रकार

की अनुमति देता हो, साफ-साफ उन तथ्यों को बतायेगा जिस पर राहत प्राप्त करने

के लिए दावा किया जा रहा है और किसी विवाह विघटन का अथवा न्यायिक

अलगाव का प्रत्येक आवेदन स्पष्ट करेगा कि आवेदक और विवाह के दूसरे पक्ष

के बीच कोई सन्धि नहीं है।

(2) इस भाग के अन्तर्गत प्रत्येक आवेदन में अन्तर्विष्ट वक्तव्य की आवेदक द्वारा अथवा

किसी अन्य समक्ष व्यक्ति द्वारा इस प्रकार जांच की जाएगी जैसी कि वाद-पत्र की

जांच के लिए कानून द्वारा आवश्यक होता है और सुनवाई के दौरान उसे साक्ष्य

के रूप उद्घृत किया जा सकता है।

(44)

(42) सिविल व्यवहार प्रक्रिया संहिता का लागू होनाः इस भाग में अन्तर्निष्ट अन्य उपबंधों के अतिरिक्त दोनों पक्षों के बीच इस भाग के अन्तर्गत सारी कार्रवाई जहां तक संभव हो, सिविल कार्यविधि संहिता, 1908 (1908 का अधिनियम ( V ) के अनुसार विनियमित की जाएगी।