अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 410

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(45)

(43) कार्रवाई में आज्ञप्तिः इस भाग के अन्तर्गत दिये गये किसी भी आवेदन से, चाहे इसके बचाव में कुछ कहा गया हो अथवा नहीं, यदि न्यायालय संतुष्ट है कि राहत दिए जाने का कोई भी आधार विद्यमान है और यह आवेदन प्रतिवादी के साथ हाथ मिलाकर नहीं दिया गया है अथवा अभियोग चलाया गया है अथवा व्यभिचार की कोई भी शिकायत, यदि कोई है, अनदेखी नहीं की गई है अथवा उस पर ध्यान नहीं दिया गया है, तो न्यायालय तदनुसार इस प्रकार राहत दिये जाने का डिक्री देगा।

(40) न्यायालय जिसमें आवेदन दिया जाएः

(1) इस भाग के अन्तर्गत कोई भी आवेदन उस जिला न्यायालय में दिया जाएगा जिसके सामान्य सिविल न्यायाधिकार की सीमा में पति और पत्नी रहते हों अथवा पहले साथ-साथ रहे हों।

भाग III (2) , डिविजन अधिनियम

(48) अभियोग की सुनवाई बन्द कमरे में होः यदि कोई भी पक्ष चाहता हो अथवा यदि न्यायालय उचित समझती है तो इस भाग के अन्तर्गत सुनवाई बन्द कमरे में होगी।

(42)

(41) विषय और आवेदन की जांचः

(1) इस भाग के अन्तर्गत दिया गया प्रत्येक आवेदन, मामले भाग X , इण्ड डिवि. की प्रकृति जिस प्रकार की अनुमति देती हो, साफ-साफ अधिनियम उन तथ्यों को बताएगा, जिस पर राहत प्राप्त करने के लिए दावा किया जा रहा है और विवाह विघटन की आज्ञप्ति के लिए अथवा न्यायिक अलगाव के लिए प्रत्येक आवेदन स्पष्ट करेगा कि आवेदक और विवाह के दूसरे पक्ष के बीच कोई सन्धि नहीं है।

(2) इस भाग के अन्तर्गत प्रत्येक आवेदन में अन्तर्निष्ट वक्तव्य आवेदक द्वारा अथवा किसी अन्य सक्षम व्यक्ति द्वारा इस प्रकार जांचा जाएगा जैसा कि वाद-पक्ष की जांच के लिए कानून द्वारा आवश्यक होता है और सुनवाई के दौरान उसे साक्ष्य के रूप में उद्घृत किया जा सकता है।