अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 411

396 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(43)

(42) सिविल कार्यविधि संहिता का लाभ होनाः इस भाग में अन्तर्निष्ट अन्य उपबंधों के अतिरिक्त दोनों पक्षों के बीच इस भाग के अन्तर्गत सारी कार्रवाई, जहां तक हो सके, सिविल व्यवहार प्रक्रिया की संहिता, 1908 (1908 का अधिनियम 5) के अनुसार विनियमित की जाएंगी।

(44)

भाग 15, एण्ड. डिवि. अधिनियम

आज्ञप्ति की कार्रवाईः इस भाग के अन्तर्गत दिए गए किसी भी आवेदन पर, चाहे इसके बचाव में कुछ कहा गया हो या नहीं, यदि न्यायालय संतुष्ट है कि राहत दिये जाने का कोई भी आधार विद्यमान है और यह आवेदन प्रतिवादी के साथ मिलकर नहीं दिया गया है अथवा अभियोग चलाया गया है, अथवा व्यभिचार की कोई शिकायत, यदि कोई है तो अनदेखी नहीं की गई है अथवा उस पर ध्यान नहीं दिया गया है, न्यायालय तदनुसार इस प्रकार राहत दिये जाने का आज्ञप्ति देगी।

(46)
विवाह-विच्छेद की कार्रवाई में पारित
किये जाने वाले दूसरे आदेश

(44) संभरण वादकालीनः इस भाग मे अन्तर्गत किसी कार्रवाई में जहां न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि पत्नी के पास अपना व्यय वहन करने के लिए और पत्नी के प्रार्थना -पत्र पर, हो रही कार्रवाई में आवश्यक खर्च के लिए कोई पर्याप्त पत्र पर, हो रही कार्रवाई में आवश्यक खर्च के लिए कोई पर्याप्त आय का स्वतंत्र आधार नहीं है तो वह पति को कार्रवाई का खर्च देने के लिए आदेश कर सकती है और कार्रवाई के दौरान यह व्यय महीने के आधार पर इस तरह कि पति की कुल आय के पांचवे हिस्से से अधिक नहीं होना चाहिए अथवा जैसा न्यायालय को उचित प्रतीत हो।

(47)

(45) स्थायी संभरणः

(1) इस भाग के अन्तर्गत अपने न्यायाधिकार का प्रयोग करते हुए कोई भी न्यायालय कोई

आज्ञप्ति दिये जाने के समय अथवा परिवर्ती किसी समय इसी संबंध में इस उद्देश्य

के लिए किए गए आवेदन पर, आदेश दे सकती है कि पति यदि पत्नी चरित्रवान है