398 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(46)
(46) स्थायी संभरणः
(1) इस भाग के अन्तर्गत अपने न्यायाधिकार का प्रयोग करते हुए
खंड 6 , मुम्बई
कोई भी न्यायालय, कोई आज्ञप्ति दिये जाने के साथ अथवा अधिनियम
परिवर्ती किसी समय इसी संबंध में, इस उद्देश्य के लिए किए गए
आवेदन पर, आदेश दे सकती है कि पति, यदि पत्नी चरित्रवान् है और अविवाहित
है पत्नी की सुरक्षा करेगा और उसके भरण-पोषण और निर्वहन के लिए पत्नी,
पति की कुल संपत्ति का अथवा मासिक आधार पर अथवा नियतकालिक रूप से
उस अवधि के लिए जो कि पत्नी के पूरे जीवनकाल से अधिक नहीं होगी, उसकी
अपनी संपत्ति यदि कोई है को ध्यान में रखकर धन का भुगतान करेगा। उसके पति
की संपत्ति से और पक्षों के आचरण न्यायसंगत होगा।
(2) यदि न्यायालय संतुष्ट है कि उपखंड (1) के अन्तर्गत आदेश दिये जाने के उपरान्त
किसी भी समय दोनों पक्षों की परिस्थितियों में कोई परिवर्तन आया है, तो यह
किसी भी पक्ष के द्वारा कहे जाने पर, अपने आदेश को इस प्रकार परिवर्तित कर
सकता है, संशोधित कर सकता है अथवा निरस्त कर सकता है जैसा कि उसे
उचित प्रतीत हो_
(3) यदि न्यायालय संतुष्ट है कि पत्नी ने, जिसके पक्ष में उपखंड (1) या (2) के
अन्तर्गत निर्णय दिया गया है, विवाह पुनः कर लिया है अथवा सच्चरित्र नहीं है,
तो यह अपना आदेश परिवर्तित/निरस्त कर सकती है।
(47)
(47) बच्चों का संरक्षणः इस भाग के अन्तर्गत किसी भी खंड 15 , मुम्बई कार्रवाई में, न्यायालय समय-समय पर अंतरिम आदेश दे सकता है अधिनियम और डिक्री में ऐसे प्रावधान बना सकता है जो न्यायसंगत और उचित हो, उनकी इच्छाओं का ध्यान रखते हुए छोटे बच्चों के संरक्षण, भरण-पोषण और शिक्षा के लिए उचित हो और निर्णय देने के बाद आवेदक द्वारा इस उद्देश्य के लिए आवेदन दिए जाने पर बच्चों के संरक्षण, भरण-पोषण और शिक्षा के संबंध में अपने सभी आदेशों और प्रावधानों के संबंध में अपने आदेश को समय-समय पर वापस ले सकती है अथवा परिवर्तित कर सकती है जैसा कि उन अंतरिम आदेशों और आज्ञप्तियों में दिया गया है, जिसमें आज्ञप्ति प्राप्त करने की कार्रवाई लम्बित है।