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(2) खंड 24 क के उपखंड (4) में दिए गए उपबंधों को छोड़कर इस खंड के अन्तर्गत
संपन्न हुआ कोई भी विवाह अकृतता को आज्ञप्ति द्वारा रद्द हो सकता है यदि यह
खंड 7 के उपखंड ( 1 ) या ( 4 ) में दी गई शर्तों के प्रतिकूल हैं।
(3) जब इस भाग के अन्तर्गत अकृतता की आज्ञप्ति द्वारा कोई विवाह रद्द हो जाता है
तो दोनों पक्ष कभी भी विवाह नहीं हुआ माने जायेंगे और न ही कभी उनके बीच
पति -पत्नी का रिश्ता रहेगा।
बशर्ते जब अकृतता की आज्ञप्ति द्वारा कोई विवाह इस आधार पर रद्द हो जाता है
कि पूर्व पति या पत्नी जीवित थे और यह विनिर्णीत होता है कि परिवर्ती संपन्न
हुआ विवाह आपसी विश्वास विश्वास पर संपन्न हुआ था और एक या दोनों पक्ष
यह अच्छी तरह विश्वास करते थे कि पूर्व पति या पत्नी मर चुके हैं, तो ऐसे
मामले में आज्ञप्ति दिए जाने से पूर्व जन्म लिए हुए बच्चों के बारे में आज्ञप्ति में
विशेष उल्लेख किया जाएगा और वे सभी मामलों में हमेशा अपने माता-पिता की
वैध संतान समझे जाएंगे।
(53)
(49ख) मरुमकट्यम अथवा अलियसंतान विवाह के संबंध में तलाक की प्रक्रिया और आवेदनः
(1) खंड 24 (क) के उपखंड (4) में दिए गए उपबंधों के अतिरिक्त उस खंड के
अन्तर्गत विवाह का कोई भी पक्ष तलाक के आदेश द्वारा ऐसे विवाह को रद्द करने
के लिए जिला न्यायालय में आवेदन दे सकता है।
(2) इस आवेदन में, विवाह का स्थान, विवाह की तिथि और संरक्षक का नाम व पता,
यदि कोई है, जिसकी सहमति से विवाह संपन्न हुआ था, का उल्लेख होगा।
(3) इस आवेदन की एक प्रति आवेदक के खर्चे पर प्रतिवादी के पास भेजी जायेगी।
(4) आवेदन के प्रस्ताव पर, जोकि उपर्युक्त आवेदन की प्रति भेजने की तिथि के 6
महीने से पूर्व और एक वर्ष के बाद न की गई हो, यदि आवेदन इसी बीच वापस
न कर लिया गया हो तो न्यायालय, स्वयं संतुष्ट होने पर, कुछ जांच-पड़ताल
करने के बाद जैसा कि उसे उचित प्रतीत हो कि कोई विवाह, जो कि खंड 24
क के अन्तर्गत वैध हो, दोनों पक्षों के मध्य संपन्न हुआ हो और यह विवाह खंड
7 के उपखंड ( I ) और ( IV ) में उल्लिखित दोनों शर्तों को पूरा करता हो, अपने
लिखित आदेश द्वारा विवाह को रद्द हुआ घोषित कर सकता है।