अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 417

402 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(5) विवाह का विलोपन आदेश की तिथि से प्रभावी होगा और कोई भी पक्ष तत्पश्चात् इस

भाग के उपबंधों को ध्यान में रखते हुए पुनर्विवाह करने के लिए स्वतंत्र होगा।

(6) जब इस खंड के अन्तर्गत तलाक के आदेश से कोई विवाह रद्द हो जाता है तो दोनों

पक्ष आदेश की तिथि से दोनों के बीच पति-पत्नी का रिश्ता नहीं रहेगा और इस विवाह

से पैदा हुए बच्चे हर तरह से हमेशा अपने माता-पिता की वैध संतान माने जाएंगे।

(54)

(50) मरुमकट्यम अथवा अलियसंतान विवाह के कुछ उपबंधों का लागू होनाः

(1) खंड 39 से 48 तक के उपबंध जहां तक हो सके, इस अध्याय के अन्तर्गत

विवाहोच्छेद की कार्रवाई में, खंड 24क के अन्तर्गत संपन्न किसी भी विवाह चाहे

विघटन के आदेश से अथवा अकृतता की आज्ञप्ति से रद्द हुआ हो, लागू होंगे।

(2) इस खंड में अन्तर्विष्ट कोई भी उपबंध खंड 24क के उपखंड (4) के संचालन

को प्रभावित नहीं करेगा और उपखंड (1) में दिए गए उपबंधों के अतिरिक्त,

अध्याय 2 अथवा 3 में अन्तर्विष्ट कोई भी उपबंध इस खंड में अन्तर्गत संपन्न हुए

किसी विवाह पर अथवा इस संबंध में लागू नहीं होगे।

(55)
अध्याय - पांच
रक्षक

(51) पूर्व विवाहों के रक्षक और तत्संबंधी विशेष उपबंधः

(1) इस संहिता के लागू होने से पहले हिंदुओं के मध्य संपन्न हुआ कोई भी विवाह,

जो कि अन्यथा वैध है, कभी भी मात्र इस आधार पर अवैध नहीं माने जाएंगे

अथवा कभी अवैध रहे होंगे कि दोनों पक्ष एक ही गोत्र अथवा प्रवर से संबंधित

हैं अथवा विभिन्न जातियों से संबंधित हैं अथवा उसी जाति के उप-भाग हैं।

(2) इस संहिता के आरम्भ होने से पहले स्त्री व हिंदू पुरुष के बीच संपन्न हुआ विवाह

जिसमें स्त्री विवाह के समय प्रचलित मरुमकट्यम और अलियसंतान के नियमों

द्वारा शासित हो और जो कि वैध हो वैध बना रहेगा और इस संहिता के आरम्भ के

समय चल रहा हो। और इस संहिता में अन्तर्विष्ट मरुमकट्यम अथवा अलियसंतान

विवाहों के विवाहोच्छेद के संबंध विशेष उपबंध ऐसे विवाह पर अथवा इस संबंध