404 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(51) बचत रक्षाः
(1) इस भाग में अन्तर्विष्ट कोई भी उपबंध किसी सांस्कारिक खंड 4 , खंड 34, पृष्ठ विवाह विघटन कराने के लिए मद्रास मरुमकट्यम 22, मुंबई अधिनियम अधिनियम, 1932 (1932 का मद्रास नियम 22) में दिए
गए किसी भी अधिकार को प्रभावित करने वाला नहीं माना जाएगा चाहे यह विवाह इस संहिता के आरम्भ होने से पूर्व अथवा बाद में संपन्न हुआ हो।
(2) इस भाग में अन्तर्विष्ट कोई भी उपबंध विवाह विघटन के लिए अथवा विवाह अकृतता
के लिए अथवा न्यायिक विच्छेद के लिए जो कि इस संहिता के लागू होने की तिथि
को लम्बित रहा हो, थोड़े समय के लिए प्रचलित किसी अन्य कानून के अन्तर्गत
किसी भी कार्रवाई को प्रभावित नहीं करेगा और ऐसी कोई भी कार्रवाई आगे चलती
रह सकती है तथा निश्चित हो सकती है मानो कि यह संहिता पारित नहीं हुई हो।
(51ख) लम्बित कार्रवाईयों की रक्षाः इस भाग में अन्तर्विष्ट कोई भी उपबंध विवाह विच्छेद के लिए अथवा न्यायिक विच्छेद के लिए जो कि इस संहिता के लागू होने की तिथि को लम्बित रहा हो, थोड़े समय के लिए प्रचलित किसी अन्य कानून के अन्तर्गत किसी भी कार्रवाई को प्रभावित नहीं करेगा और ऐसी कोई भी कार्रवाई आगे चलती रह सकती है तथा निश्चय कर सकती है मानों कि यह संहिता पारित ही नहीं हुई हो।
यह बिल मामले की आवश्यकताओं पर विचार की तुलना में ‘‘महिला भावना’’ को अधिक व्यक्त करता है। तभी विभाग ने एक सर्वाधिक अभूतपूर्व कार्य हाथ में लिया है। वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं, कि बिल का प्रारुप उपयुक्त रूप से तैयार नहीं हुआ था, कि इसमें कुछ खामियां थीं, कि इसे पुनः तैयार किया जाना था। बिल में अनेक अलग अध्याय बनाए गए थे, जिनके अलग क्रमांक और अलग परिभाषाएँ थीं, जो एक-दूसरे से पूरी तरह अलग थे। विधायी विभाग ने सोचा कि यह त्रुटि थी और बिल दोबारा तैयार करना किया जाना चाहिए। जिसमें क्रमांक निरंतर रूप में हो और वह पूर्ण रूप से एक हो।
मेरा मानना है कि विधायी विभाग जिस क्षण उस निष्कर्ष पर पहुंचा था, वही समय था बिल वापस लेने का और एक नया बिल तैयार करने का, जिसे मंत्रालय स्वीकार कर सकता था, और उसे एक नए बिल के रूप में प्रस्तुत कर सकता था। इसके बजाय विभाग विधायी प्रारूप की तैयारी में लग गया, जिससे मैं सर्वथ अनभिज्ञ था। भारत और विदेश के संपूर्ण संवैधानिक इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण प्रस्तुत नही होगा कि एक बिल के प्रस्तुत होने और उसे प्रवर समिति के भेजे जाने के बाद कोई विभागीय बिल तैयार किया जा रहा हो। श्री रामनारायण सिंह ने कल पूछा था कि प्रारुप समिति को क्या प्राधिकार था कि वह कुल मिलाकर एक नया बिल तैयार कर सकें। (एक माननीय