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श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं मानता हूँ कि माननीय विधि मंत्री परिस्थिति से पूरी तरह अवगत हैं, पर मुझे थोड़ा संदेह है कि इस समय उन्हें यह ज्ञात है कि विभागीय बिल में कौन से गंभीर बदलाव किए गए हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता। पर, मैं उन्हें सुनने के लिए प्रतीक्षारत हूँ।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः माननीय विधि मंत्री ने कहा है ‘‘कुछ गंभीर बदलाव हुए हैं, किंतु मैंने कुछ नहीं किया है। यह सब प्रवर समिति ने किया है। विभागीय समिति ने कोई बदलाव नहीं किए हैं।’’ वास्तव में मैंने कल एक सुस्पष्ट प्रश्न किया था, जिसका कृपा पूर्वक उत्तर दिया कि जो विभागीय समिति गठित की गई थी, क्या उसे निर्देश दिए गए थे कि वह कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं करें। ऐसा इस तथ्य के कारणवश था जो मैंने प्रवर समिति की रिपोर्ट में प्रवर समिति के अधिकांश सदस्यों की घोषणा में पाया था। ‘‘यह संशोधित प्रारुप मूल बिल के कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं करता है।’’ यही घोषणा मैं समझता हूँ प्रवर समिति को दी गई थी उसके द्वारा कि कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं किए गए हैं। इस आधार पर कि, जबकि मूल बिल उनके पास था, उन्होंने उसे सावधानीपूर्वक नहीं देखा और इस दृष्टि से उसका मिलान नहीं किया कि क्या कोई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
श्रीमती रेणुका रेः अध्यक्ष महोदय, एक आपत्ति व्यवस्था पर। क्या प्रवर समिति में जो घटित हुआ है, उन विवरणों को क्या इस तरीके से उठाए जाने की अनुमति है?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः इस आपत्ति के संबंध में, मैं पहले ही कर चुका हूँ किः
श्रीमती रेणुका रेः श्रीमान्, यह एक व्यवस्था संबंधी आपत्ति है, जिस पर मैं आपका निर्णय चाहती हूँ।
माननीय अध्यक्षः मैं समझता हूँ कि यह कोई व्यवस्था संबंधी आपत्ति नहीं है। यह केवल श्री नजीरुद्दीन अहमद का अनुमान है कि प्रवर समिति ने ऐसा किया है अथवा ऐसा कोई कार्य नहीं किया है। मैं सोचता हूँ कि माननीय सदस्य प्रवर समिति पर अथवा प्रवर समिति के सदस्यों पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगाएंगे। वे अपने तर्क को आगे बढ़ा सकते हैं।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः प्रवर समिति ने जिस तरीके से बर्ताव किया है, उसकी सदन में आलोचना की जा सकती है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरा कहना हैख्...,
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः अध्यक्ष महोदय, आप सही हैं। आरोप लगाए बिना वह अपना तर्क रख सकते हैं।