अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 423

408 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्रीमती रेणुका रेः किंतु वह आरोप लगा रहे हैं।

माननीय अध्यक्षः उनके अनुमान बढि़या हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान्, मेरा अनुमान है कि प्रवर समिति के सदस्यों को निश्चित रूप से माननीय मंत्री जी द्वारा आश्वासन दिया गया थाख्...,

श्रीमती रेणुका रेः श्रीमान्, मुझे इस पर आपत्ति है। ये अनुमान नहीं, आरोप लगा रहे हैं।

माननीय अध्यक्षः प्रत्येक माननीय सदस्य को अपने अनुमान व्यक्त करने की स्वतंत्रता है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान्, मैं मानता हूँ कि प्रवर समिति के किसी भी सदस्य द्वारा तत्काल इसका खंडन किया जा सकता है।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः नहीं_ वस्तुतः हम खंडन नहीं कर सकते। किंतु आप खंडन करने के लिए चूंकि आमंत्रित कर रहे हैं, प्रवर समिति के एक सदस्य के रूप में मैं इसका खंडन करता हूँ। मेरा कहना है कि हमने सम्पूर्ण मामले पर विचार किया है और हम संतुष्ट है किख्...,

श्री नजीरुद्दीन अहमदः आप बयान दे रहे हैं।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः आप खंडन चाहते हैं। और मैं खंडन कर रहा हूँ।

श्रीमती रेणुका रेः अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूँगी क्योंकि अनुमान तैयार किए जाते हैं और आरोप गढ़े जाते हैं, प्रवर समिति के सदस्य एक बड़ी अजीब स्थिति में आ गए हैं, अतः इस स्थिति में वह सब सामने लाना होगा, जो प्रवर समिति में घटित हुआ है, पर जिसे हम यहां नहीं ला सकते।

माननीय अध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर। मैं माननीय सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि प्रवर समिति के सदस्यों के विरुद्ध कोई आरोप न लगाएं। वह अपना तर्क रख सकते हैं कि बिल में बदलाव कैसे हुआ है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं अपनी इच्छा से तब तक कोई आरोप नहीं लगाऊँगा, न ही किसी माननीय सदस्य पर कोई आरोप नहीं मढूंगा जब तक कि किसी स्तर पर ऐसा करना आवश्यक न हो। यदि कुछ ऐसा बुरा किया गया हो, जिससे 30 करोड़ लोगों का हित प्रभावित होता हो और यदि प्रवर समिति के सदस्यों द्वारा कोई भूल अथवा चूक की गई हो तो मुझे उसकी सम्मानपूर्वक किंतु खुले मन से आलोचना करनी चाहिए। सदन के एक सदस्य को इतना लाभ तो मिलना ही चाहिए। यदि मैं गलत हूँ तो मुझे सुधार भी