अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 424

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करना चाहिए। केवल आरोप गढ़ने के लिए ही मुझे कोई आरोप नहीं गढ़ने चाहिए। किंतु मैं अपने आपको प्रक्रिया के कुछ गंभीर बदलावों और उन त्रुटियों पर उंगली उठाने के लिए तैयार करूंगा, जो बिल की खूबियों को प्रभावित करते हैं, और उस पर होने वाली वार्ता के लिए प्रवर समिति के सदस्यों की आलोचना में मुझे निश्चित रूप से शामिल होना होगा। प्रवर समिति के सदस्यों को बातचीत से क्यों डरना चाहिए?

श्रीमती रेणुका रेः हम बातचीत करने से नहीं डरते। लेकिन प्रवर समिति में क्या कुछ हुआ, हमें उस पर बोलने का अधिकार भी मिलना चाहिए।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः प्रवर समिति की यह तथाकथित पवित्रता इस संबंध में कई बार छिन्न-भिन्न हुई है।

श्री महावीर त्यागी (यू.पी.ः सामान्य) इसमें पवित्रता जैसी कोई बात नहीं है। हम इस पर बातचीत कर सकते हैं।

श्री एल. कृष्ष्णास्वामी भारतीः हम वार्ता के लिए तैयार हैं।

श्री मिहिर लाल चट्टोपाध्याय (पं. बंगालः सामान्य) श्रीमान्, क्या सदस्यों को इस प्रकार की बातचीत जारी रखने की अनुमति देनी चाहिए?

माननीय अध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर। जो कुछ हो रहा है, मैं देख रहा हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि माननीय सदस्य, भाषणकर्ता को अपनी बात जारी रखने की अनुमति प्रदान करेंगे।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः माननीय उपाध्यक्ष ने कल डॉ. अम्बेडकर से कहा था कि वे स्पष्ट करें कि इस तरह की स्थितियां क्यों उत्पन्न हुई हैं। डॉ. अम्बेडकर ने कहा है कि यह सब उनके दोस्तों की तुलना में बढ़ते दुश्मनों के प्रभाव के कारण हुआ है। वे एक साथ मिल गए हैं इसलिए यह सब किया है। इससे प्रवर समिति के तथाकथित रहस्यों का तो पता नहीं चल पाता।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं माननीय सदस्य को बीच में बिल्कुल भी रोकना नहीं चाहता था। किंतु अब मैं सोचता हूँ कि यह मेरा कर्तव्य है कि मैं आपका ध्यानाकर्षित करूं, साथ ही अध्यक्ष महोदय का भी ध्यानाकर्षित करूं कि उनका इशारा इस ओर था कि चूंकि बिल में कुछ बदलाव किए गए हैं, अतः इसे पुनः चालित किया जाना चाहिए था। मैं सोचता हूँ कि इस इशारे के लिए सबसे सुसंगत यह होगा कि उन्हें किसी प्रारंभिक बातचीत के बिना सीधे यह कहना चाहिए था कि क्या बदलाव किए गए हैं। मैं उनसे यह सुनने की प्रतीक्षा कर रहा था।