अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 425

410 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमदः जब अन्य मुद्दे उठे थे, तो मैं ऐसा ही करने वाला था।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः एक बात व्यवस्था संबंधी आपत्ति पर। मैं यह बताना चाहूँगा कि यह प्रश्न सदन के सदस्यों के हितों को प्रभावित करता है। मुद्दे के संबंध में प्रश्न यह है, क्या सदन के सदस्यों को प्रक्रिया को लेकर प्रवर समिति के सदस्यों के दुर्व्यवहार अथवा गलत आचरण की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है? मान लो यदि किसी प्रवर समिति के समक्ष कोई बिल प्रस्तुत किया जाता है और उक्त प्रवर समिति द्वारा ऐसे किसी बिल पर विचार कर लिया जाता हो, जो पहले बिल के स्थान पर रखा गया हो, तो क्या सदन के सदस्य उन्हें कुछ कहने के पात्र नहीं हैं? आप इस मुद्दे पर क्या कोई नियम बता सकते हैं कि क्या सदन के सदस्य प्रवर समिति के आचरण की आलोचना नहीं कर सकते? प्रवर समिति में जो कुछ भी हुआ है उसके रहस्योद्घाटन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। परन्तु जिस तरीके के कार्यवाही घटित हुई है, उसकी आलोचना होनी चाहिए। अन्यथा यह मान लिया जाएगा कि एक बिल पर सदन के सदस्यों का किसी भी तरह का नियंत्रण नहीं है। यदि सदन में कोई बिल लाया जाता है तो वह सदन की संपत्ति बन जाता है और प्रत्येक सदस्य को प्रवर समिति में होने वाली अनियमिताओं को उजागर करने का अधिकार है।

माननीय अध्यक्षः यह बात आपत्ति की नहीं है। वक्ता महोदय कृपया अपनी बात जारी रखें।

माननीय श्री.के. संथानम (रेलवे एवं परिवहन राज्य मंत्री)ः मैं यह कहना चाहता हूँ के जब सदन को प्रवर समिति की आलोचना करने का अधिकार है तो यह भी सुनिश्चित करना चाहूँगा कि, इसे यह कहने का अधिकार नहीं है कि इसके समक्ष प्रस्तुत बिल वह बिल नहीं है जिसका इसे संदर्भ दिया गया था। सदन को यह नहीं बताया गया था कि वह यह बिल नहीं था, जो प्रवर समिति को भेजा गया था। यदि सदन यह समझता है कि प्रवर समिति ने अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं किया है, तो वह प्रवर समिति की निन्दा कर सकता है। जब कभी सदन के समक्ष कोई बिल प्रस्तुत होता है और उस पर विचार-विमर्श होता है तब हमारे समक्ष उसका खुलासा नहीं किया जाता यह वह बिल नहीं है, जो सदन के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरा कहना है कि मैं केवल प्रवर समिति की निन्दा कर रहा था और इससे अधिक और कुछ नहीं।

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य बिल्कुल सही हैं। यदि वह बिल की आलोचना करते हैं, क्योंकि प्रवर समिति के कार्य से यह स्पष्ट हुआ है और किए गए बदलाव सामने आए हैं। अतः अब अपनी टिप्पणियां बिल में हुए बदलावों तक सीमित रखेंगे।