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श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं यह बताने की स्थिति में हूँ कि उस पर न केवल उन्होंने, बल्कि उस समय मैंने भी बिल को स्वीकृति दी थी। (हस्तक्षेप)। मैं यह निवेदन करता हूँ कि मैं सदन के अधिकार-क्षेत्र में हूँ।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य हिंदू कानून के संशोधनों के इतिहास की बातें कर रहे हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरा मानना है, कि विवाहित हिंदू महिलाओं के सम्पत्ति के अधिकार का अधिनियम पहली भूल थी और मैं बताना चाहूंगा कि इससे उपजी अन्य भयंकर भूलें इस वर्तमान बिल में भी शामिल हैं।
श्रीमती जी. दुर्गाबाईः वर्तमान की तुलना में तत्कालीन विधायिका का यह एक गंभीर मूल्यांकन है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरा कहना है कि विधायिका ने अपनी गलती स्वयं स्वीकार की थी और मैं उन वाक्यांशों को उद्धत कर सकता हूँ जिनमें विधायिका ने यह स्वीकार किया है कि वह एक गलती थी। (हस्तक्षेप)।
माननीय अध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं दिखाऊँगा कि गलती कैसे हुई। वास्तव में, मृत पुत्र, पौत्र और परपौत्र की विधवा को सम्पत्ति का उत्तराधिकार देने में, पुत्री की स्थिति एकदम अनिश्चित हो गई। यह अधिनियिम के अंतर्गत ऐसी स्थिति में पुत्री की क्या स्थिति हुई होगी, कोई नहीं जानता।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सर एन.एन. सिरकार द्वारा मेरे मित्र डॉ. देशमुख से एक शपथ -पत्र लिया गया था कि सरकार इन उपायों का तभी समर्थन करेगी यदि वह पुत्री शब्द को हटा दें और उन्होंने वचन दिया था कि वह ‘पुत्री’ शब्द को हटा देंगे।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मुझे भी उस कानून के इतिहास की उतनी जानकारी है, जितनी की माननीय डॉ. अम्बेडकर को है।
माननीय अध्यक्षः क्या माननीय सदस्य और समय लेना चाहते है?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः जी हाँ, श्रीमान्।
माननीय अध्यक्षः ऐसी स्थिति में, वह अपना अभिभाषण बाद में जारी रख सकते हैं और अब हम यहां इस सभा को स्थगित करते हैं।
इसके पश्चात् गुरुवार दिनांक 3 मार्च, 1949 को प्रातः सवा ग्यारह बजे तक के लिए विधानसभा स्थगित कर दी गई।