अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 437

422 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्रीमती एनी मॅस्क्रेनीः यदि वह कुछ दिनों के लिए अनुपस्थित रहता है और वापस आकर शिकायत करता है कि उसे सदन की कार्यसूची की जानकारी नहीं है तो श्रीमान् क्या उसे माफी दी जा सकती है?

माननीय अध्यक्षः सदन में उसके बयान के आधार पर ही इस पर निर्णय किया जा सकेगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः आज दोपहर के भोजन के लिए यहां से जाने से पहले मैं इस विधान के इतिहास के पहले भाग पर चर्चा कर रहा था। वर्ष 1937 के अधिनियम और 1938 के संशोधित अधिनियम में पुत्री को लेकर कठिनाइयां बढ़ीं और स्थिति को स्पष्ट करने के लिए बड़ी संख्या में बिल सामने आए। उस स्थिति में सरकार मामले की जांच के लिए सहमत हुई और उसने राउ समिति का गठन किया। शीर्घ ही राउ समिति ने पाया कि जहां तक कृषि भूमि का संबंध था, विधानसभा को अधिनियम पारित करने का कोई न्यायिक अधिकार नहीं था। इस संबंध में यह मुद्दा उठा कि पिछले संविधान के तहत कृषि भूमि केन्द्र की विधायी सूची में शामिल थी। उक्त बिल मार्च 1937 में निचले सदन द्वारा पारित किया गया था, जब वह सदन पुराने संविधान के तहत कार्य कर रहा था। ऊपर सदन में इसे अप्रैल की किसी तारीख को पारित किया गया था, जब 1935 का नया संविधान लागू हुआ था। इस प्रकार जब बिल ऊपरी सदन द्वारा पारित किया गया, उस समय कृषि भूमि पर अधिनियम पारित करने का उसका कोई अधिकार-क्षेत्र नहीं रह गया था। संशोधित अधिनियम, 1938 जब पारित हुआ तब किसी भी सदन के पास उसे पारित करने का अधिकार नहीं था। विधायिका द्वारा ये अपनी समय की घातम भूलें थीं। राउ समिति ने राय लेने हेतु मामले को फेडरल कोर्ट में भेज दिया। फेडरल कोर्ट ने एक निर्णय दिया कि सदन कोख्...,

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (कानून मंत्री)ः यह इतिहास पूरी तरह गलत है।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रासः सामान्य)ः राउ समिति मामले को फेडरल कोर्ट कैसे भेज सकती थी?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः क्या यह बिल्कुल गलत है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, बिल्कुल गलत।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः किस संबंध में?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इस बारे में अपने उत्तर में बताऊंगा।

पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः वह काफी सही हैं।