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श्री नजीरुद्दीन अहमदः राउ समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी और वहाँ से गर्वनर जनरल ने मामले को फेडराल कोर्ट में भेज दिया। मैं तकनीकी विवरण देने में केवल एक मिनट की गलती कर गया था। मैं पुनः दोहराता हूँः राउ समिति ने उचित माध्यम - गवर्नर जनरल द्वारा मामले को फेडरल कोर्ट में भेजा। क्या यह गलत है? मैं काफी सही था यानी बिल्कुल गलत नहीं था। (हस्तक्षेप)।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य अपना वक्तव्य जारी रखें।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः इस प्रकार जब मामला राउ समिति द्वारा फेडरल कोर्ट में भेजा गया और कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि जहां तक कृषि भूमि का संबंध है विधायिका ने अभी तक अधिकारातीत काम किया है। यह एक घातक भूल थी जिसका समय रहते पता चल गया। जैसे ही फेडरल कोर्ट का निर्णय सामने आया मैं भी उस परिदृश्य में सामने आ गया। हिंदू कोड के साथ मेरे संबंध आकस्मिक अथवा हालिया नहीं है। मैं सदन को यह स्पष्ट करने की स्थिति में हूँ कि मैं काफी पहले 1941 से ही इस कानून के संबंध में विधिक कार्रवाई कर चुका था। उस समय मैं बंगाल विधानसभा का एक सदस्य था और मैंने राउ समिति की प्रथम रिपोर्ट जारी होने से पहले ही एक बिल प्रस्तुत कर दिया था। जैसे ही फेडरल कोर्ट का निर्णय सामने आया, मैंने बंगाल विधानसभा में अधिनियम को बंगाल में भी लागू करने, उसे कृषि के संबंध में भी एक बिल प्रस्तुत कर दिया। इस संबंध में यह भारत का उस समय का पहला कानूनी प्रयास था।
श्री तजामुल हुसेन (बिहारः मुसलमान)ः क्या मैं अपने माननीय मित्र से यह जानकारी पा सकता हूँ कि यदि उस समय वह हिंदू कोड बिल के पक्ष में थे, तो किस समय उनका मन इससे बदल गया?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः हिंदू कोड बिल उस समय तक बना भी नहीं था। उस समय कई अन्य व्यक्तियों की तरह जहां तक इस विषय का संबंध है, कई अन्य प्रसिद्ध व्यक्तियों की तरह, यह बाद में ज्ञात हुआ कि मैंने गलत कदम उठाया था। वास्तव में, मैं इस अधिनियम के अंतर्गत बंगाल की कृषि भूमि को भी शामिल करना चाहता था। वही उस बिल का उद्देश्य था, जो मैंने बंगाल विधानसभा में रखा था। इस पर रायशुमारी के लिए इसे पूरे बंगाल में परिचालित किया गया था और आम जनता ने काफी बड़ी संख्या में बिल के पक्ष में अपनी राय दी थी। प्रत्येक व्यक्ति ने उस समय मेरी इस सोच को पसंद किया था कि बिल सही था।
श्री तजामुल हुसेनः श्रीमान्, माननीय सदस्य ने अपने उन कारणों का उल्लेख नहीं किया कि उन्होंने अपना मन क्यों बदला?