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अब राउ समिति की उस रिपोर्ट के संबंध में उन्होंने एक बिल तैयार किया था, जो- ‘हिंदू कोड बिल-भाग 1 निर्वसीयती उत्तराधिकार’ था और जिसे केन्द्रीय विधानसभा में रखा गया था और जिसे केन्द्रीय विधायिका के दोनों चैम्बर्स की एक बहुत शक्तिशाली संयुक्त प्रवर समिति को भेजा गया था। मेरे पास प्रवर समिति की रिर्पार्ट है। एक ओर तो इसका जोरदार समर्थन किया गया था, किंतु दूसरी ओर इसका लगातार जोरदार विरोध भी हुआ और रिपोर्ट के अनुसार प्रवर समिति द्वारा तैयार यह बिल एक बार फिर विधायिका में आया। 1941 में बनी राउ समिति की रिर्पार्ट थी कि हिंदू कोड बिल पर उपखंडों में कार्यवाही की जाए। यह बहुत महत्वपूर्ण विच्छेद था और मैं इस तथ्य की ओर विशेष ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ कि वास्तव में राउ समिति ने रिपोर्ट जारी की थी कि हिंदू कानून की खंड-खंड में, उत्तराधिकार, विवाह, संरक्षण तथ अन्य पारित करने चाहिए। वर्ष 1941 में जारी रिपोर्ट के पृष्ठ 23 पर राउ समिति ने कहा थाः
‘‘वह अनुशंसा जिस पर हम पूरी शक्ति लगाकर जारे देना चाहेंगे, यह है कि एक सम्पूर्ण हिंदू संहिता के आरंभ में क्रमिक चरणों में, तैयारी के संबंध में, जैसा कि हमने कहा है, उत्तराधिकार के कानून के साथ-साथ विवाह के कानून का और इसी के साथ हिंदू कानून के अन्य विषयों का पालन किया जाए। यह सत्य है कि ये बड़े समूह कुछ हद तक एक-दूसरे से आपस में जुड़े हुए भी हैं_ किन्तु प्रारूपकार को, उदाहरण के लिए यदि वह विधवाओं के लिए सम्पत्ति के अधिकारों से संबंधित उलग से लिखे गए नियमों पर विचार करने की बजाय उत्तराधिकार के सम्पूर्ण कानून पर विचार करता है, तो ये देख पाना सरल होगा कि वह क्या कर रहा है। यह योजना विवादित मुद्दों पर सहमति के उपायों के लिए एक बेहतर अवसर का प्रस्ताव भी प्रस्तुत भी प्रस्तुत करेगी, जिसका क्षेत्र व्यापक होगा और जिसमें समझौते के लिए अधिक अवसर होंगे। जहां तक संभव हो, इसका उद्ेदश्य सहमति के उपायों पर पहुंचना होना चाहिए और विकट विरोधाभास उत्पन्न होने जैसी स्थितियों से बचना होना चाहिए। इस आवश्यकता का अर्थ यही है कि वास्तव में धीमे दिखने वाली सुधार की गति को सच्चे सुधार के लिए रुकने की बजाय, दृढ़ निश्चिय के साथ आगे बढ़ना चाहिए।’’
इसी संदर्भ में पृष्ठ 11 पर, राउ समिति का कथन हैः
‘‘हम यह सुझाव नहीं देते कि कानून के सभी खंडों पर एक साथ कार्रवाई की जाए। उत्तराधिकार का नियम... सबसे पहले किया जाए, तत्पश्चात् विवाह कानून आदि-आदि। प्रत्येक
खंड के कानून को कम करने उसे एक ऐसा वैधानिक रूप दिया गया है कि विभिन्न अधिनियमों को एक एकल महिला के रूप में समेकित किया जा सके।’’
यह एक रिपोर्ट थी और इसी रिपोर्ट के अनुपालन में हिंदू कोड भाग- I, इच्छा-पत्र हीन उत्तराधिकार संबंधी अपना बिल प्रस्तुत किया गया। जैसा संयुक्त प्रवर समिति ने तय किया था उत्तराधिकार से संबंधित उक्त बिल असेम्बली में आने से पहले ही संयुक्त प्रवर समिति ने स्वयं सिफारिश कर दी कि केवल इस खंड को अकेले पारित करना ठीक नहीं