अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 441

426 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है, बल्कि उसमें सम्पूर्ण हिंदू कोड की सही तस्वीर दिखनी चाहिए। चूंकि विभिन्न भाग एक-दूसरे पर आधारित होते हैं इसलिए उन्होंने सिफारिश कर दी की यह बिल पारित नहीं किया जाना चाहिए और हिंदू कानून का एक ज्यादा सच्चा और व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। तदनुसार अपनी रिपोर्ट में प्रवर समिति ने कहाः

‘‘हमारा मत है कि हिंदू कानून समिति को पुनर्जीवित करने और इस अन्तराल के बीच प्रस्तावित विधेयक के शेष भागों के बनाने और गठित करने के लिए प्रोत्साहित करने के अन्य वे उपाय भी किए जाने चाहिएस, जो वर्तमान बिल के पारित होने और उसके प्रभावी होने के बीच आते हैं। यह स्पष्टतया देख जा सकता है कि वर्तमान बिल के लागू होने से पूर्व हिंदू कानून की अन्य विविध शाखाओं के संबंध में लिए गए निर्णयों के आलोक में इसके पुनर्नियोजन और संशोधन की आवश्यकता पड़ेगी।’’

अतः उन्होंने सिफारिश की कि सदन और देश के सामनू पूरी तस्वीर होनी चाहिए। तदनुसार हिंदू कानून समिति को भंग करके उसका पुनगठन किया गया और उससे हिंदू कानून की अन्य शाखाओं की एक पूरी तस्वीर तैयार करने को कहा गया। तब उन्होंने सर्वप्रथम जो कार्य किया, वह था एक अन्य बिल ‘‘हिंदू कोर्ड भाग- III विवाह’’ प्रस्तुत करना। यह उनके द्वारा तैयार किया दूसरा बिल था और बाद में उन्होंने अन्य भाग भी तैयार किए। मैं जिस बिन्दु पर जोर देने का प्रयास कर रहा हूँ कि वे अलग-अलग स्वतः परिपूर्ण बिल थे। उत्तराधिकार का कानून पूरी तरह से स्वतः स्पष्ट था और अलग था और अलग से तैयार किए जाने में सक्षम था। विवाह कानून भी अलग से तैयार किया जाने में सक्षम था। विवाह कानून भी अलग से तैयार किया जा सकता था। ऐसे तीन भाग थे जिन्हें अलग भागों में तैयार किया गया था, यद्यपि उन्हें एक साथ एक ही खंड में मुद्रित करके परिचालित किया गया था, इसके बाद राय लेने के पश्चात्, उन्होंने अनुपूरक के रूप में कुछ बदलाव भी जारी किए। अतः सदन को यह जानकर प्रसन्नता होगी कि एक ही पुस्तक में पूरी तरह से अलग-अलग बिल अलग-अलग विषयों के साथ अलग-अलग क्रमाकों में उनके वास्तविक अर्थों और उद्देश्यों के साथ मुद्रित किए गए। तथापि, कानून मंत्रालय ने इन अलग भागों को अलग क्रमांक के साथ मुद्रित करने को गलत समझा। वास्तव में, वर्तमान बिल पर प्रवर समिति की रिपोर्ट में सत्तापक्ष के सदस्यों ने कहा है कि अलग-अलग क्रमांक और अलग-अलग हिस्से एक अज्ञात और उद्देश्यहीन बात थी और इसीलिए वे विभिन्न भागों को एक साथ पूर्ण रूप में क्रमिक अंकों के साथ प्रस्तुत देखना चाहते थे। इसका रिपोर्ट में भी स्पष्ट उल्लेख है। यही कारण है कि उन्होंने एक हिंदू संहिता तैयार की, जिसके बारे में वे सोचते थे कि वह स्वतःपूर्ण और ज्यादा व्यावहारिक थी। लेकिन उसमें अलग-अलग हिस्सों के गठन और उसके बाद सभी हिस्सों के समेकन का राउ समिति का उद्देश्य, पूरी तरह से गायब था।