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इस संबंध में जो पहली बात में यह कहना चाहूंगा कि विधि मंत्रालय द्वारा गठित बदलाव, मूल बिल के उद्देश्य से परे थे अथवा वे अलग बिलों की तरह थे। वास्तव में मूल बिल के विभिन्न भागों को एक साथ शामिल करना ऐसा कार्य था, जिससे अनेक कठिनाइयां उत्पन्न हुईं और इससे उपज संदेह भी पुष्ट हुए हैं। जैसा राउ समिति द्वारा सुझाव दिया गया था, बेहतर यह होगा कि अलग भागों को अलग-अलग पारित किया जाए, ताकि उन पर काम आपत्ति हो और सदन के साथ-साथ देश का ध्यान प्रत्येक विषयों पर भले ही सम्पूर्ण हिंदू कानून में उनका एक व्यापक दृष्टिकोण हो। अब विभिन्न भागों के बिलों को समेकित करना और उन्हें क्रमिक अंक देने में हमारे सामने यह कठिनाई आ खड़ी हुई है कि सदन का कोई भी सदस्य यह कह नहीं पाया है, कि वह पूरी तरह समेकित बिल, जैसा कि प्रवर समिति की ओर से स्पष्ट हुआ है, के पक्ष में है। कुछ सदस्य विवाह के प्रावधानों के पक्ष में हैं_ कुछ उत्तराधिकार के पक्ष में हैं। संरक्षण और अन्य बातों पर आपत्तियाँ कम हैं। जैसा कि मूल योजना में है अलग-अलग बिल मामलों को सरल कर सकते हैं, और उनसे अन्य कठिनाइयां भी कम हो जाएंगी।
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः भरण-पोषण वाले हिस्सा सर्वश्रेष्ठ है_ शेष सभी बातें बेकार हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः भरण-पोषण वाला हिस्से पर, जैसा पंडित मैत्रेय ने हमें याद दिलाया है, सब से कम आपत्ति हुई है। अतः यदि भागों को अलग-अलग रखा जाता, तो सदन अलग-अलग विषयों पर आसानी से विचार करने की स्थिति में होता। भरण-पोषण का मुद्दा विवादास्पद नहीं है। यह समाज के धार्मिक ढांचे को प्रभावित नहीं करता। यह धार्मिक भावनाओं और हिंदूओं के सदियों पुराने विश्वासों को ठेस नहीं पहुंचाता और यह एकदम पारित हो जाना चाहिए था। अलग-अलग कार्रवाई का यही कारण था। किंतु विभागीय समिति ने इसके अलग कार्रवाई को अंजाम न देकर सम्पूर्ण बातों को एक रुपेण कर दिया।
श्रीमान्, मैं यह बताना चाहता हूँ कि राउ समिति की दूसरी रिपोर्ट में भी, बिल विभिन्न
खंडों में तैयार किया गया था। उन्होंने अपना परामर्श भी दोहराया कि इसे अलग-अलग रूप में लिया जाए। आशा की गई थी कि बिल को अलग-अलग भागों में लिया जाएगा और उन पर अलग-अलग कार्रवाई की जाएगी।
जनाव तजामुल हुसेनः आप ऐसा करने का तुरंत संशोधन क्यों नहीं लाते?
जनाव नजीरुद्दीन अहमदः मेरे माननीय मित्र बाधा डालते हुए यह कहना चाहते हैं कि ‘‘मैं जैसे चाहूं स्थितियों को मिला सकता हूँ, और यह आप पर है कि आप उन्हें अलग-अलग करने के लिए उपयुक्त संशोधन लाएं।’’ यह असंभव है। यदि आप मांस,