429
इस मध्यावधि विभागीय बिल में एक गंभीर व्यवस्था की गई थी, अर्थात् विभिन्न भागों को इस प्रकार मिलाकर एक किया गया है कि उन भागों को उनके मूल रूप से अलग करना असंभव कार्य है। यह कार्य किसी अनुसंधान में लगे एक विद्यार्थी द्वारा किया जा सकता है न कि सदन के किसी सदस्य द्वारा बिना ऐसी प्रवृत्तियों और रुझानों के। अतः मैं कहता हूँ कि विभागीय समिति द्वारा पूर्णतया भिन्न विषयों को मिश्रित करके पहली भूल की गई थी। इससे एक गंभीर और अभूतपूर्व संवैधानिक अभिनवता की शुरूआत हुई।
श्रीमान्, इसके बाद विभागीय समिति ने अपने विभागीय बिल में बहुत गंभीर बदलाव किए। जब हम प्रवर समिति की कार्रवाइयों पर इस विभागीय बिल के संबंध और प्रभाव पर विचार करते है। तो ऐसा करना बहुत महत्वपूर्ण भी होगा। जैसा कि मैं दर्शाने का प्रयास करूंगा, विभागीय बिल से कई महत्वपूर्ण परिवर्तन शुरू हुए, यद्यपि मैं यह अवश्य उजागर करना चाहूँगा, यद्यपि मैं यह अवश्य उजागर करना चाहूँगा कि न तो माननीय कानून मंत्री ने, न ही प्रवर समिति के किन्हीं सदस्यों ने तथा न ही सदन के सदस्यों ने प्रभावी परिवर्तनों की गंभीरता के बारे में कोई जागरूकता दिखाई। वास्तव में, कानून मंत्री ने पिछली बार, जब वे प्रस्ताव के विचार-विमर्श के समर्थन में वर्तमान सत्र में बोले थे, बिल में हुए समुचित बदलावों के बारे में बताया था। किन्तु वे यह बताते हुए सावधान थे कि सभी बदलाव प्रवर समिति द्वारा किए गए थे। मैंने उनका भाषण ध्यान से सुना था और इसका सत्यापन अधिकारिक रिपोर्टों से किया जा सकता है। उन्होंने अंतिम रूप से तैयार बिल में मूल जोगेन्द्रनाथ मंडल के बिल के नए अंतरों के बारे में सराहनीय रूप से हवाला दिया था। यह दर्शाता है कि माननीय मंत्री जी प्रवर समिति को प्रस्तुत कथाकथित बिल में अपने विभाग द्वारा किए गए गंभीर बदलावों से पूरी तरह अनभिज्ञ थे। वस्तुतः मैंने माननीय मंत्री जी से एक अल्प सूचित प्रश्न के माध्यम से पूछा था कि क्या विभागीय समिति को मूल बिल में समुचित बदलाव करने के लिए अधिकृत किया गया था। इसका उत्तर था कि उन्हें ऐसा कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। दूसरी ओर, कानून मंत्री ने बदलावों, यदि कोई थे, कि सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली थी। श्री रामनारायण सिंह के एक अनुपूरक प्रश्न के संबंध में कानून मंत्री ने कहा है- ‘‘मैंने कोई बदलाव नहीं किए हैं।’’ वास्तव में, मुद्दा यह था कि क्या विभागीय बिल में समुचित बदलाव किए गए थे, और उन्होंने इस बारे में पूरी तरह स्पष्ट किया था कि उन्होंने कोई बदलाव नहीं किए थे और केवल प्रवर समिति ने अकेले ही यह बदलाव किए थे। पूरे सदन को प्रतीत हुआ था कि प्रवर समिति ने बदलाव किय थे और विभागीय समिति ने कोई प्रमुख बदलाव नहीं किए थे। विगत सत्र में जब मैं अपनी बात रख रहा था, मुझे बार-बार विभागीय समिति से किए गए बदलावों को पूछा जा रहा था। यह महत्वपूर्ण है कि मुझे इस संदर्भ का हवाला देना चाहिए, क्योंकि यह दर्शाता है कि प्रवर समिति के सदस्य अथवा सदन के सदस्य, यहां तक कि कानून मंत्री भी, इस बात से अवगत नहीं थे कि समुचित बदलाव