432 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री तजामुल हुसैनः क्या मुझे एक प्रश्न करने की अनुमति मिलेगी?
माननीय अध्यक्षः जी, कहिए।
श्री तजामुल हुसैनः मेरे काबिल मित्र, श्री नजीरुद्दीन अहमद सदन के समक्ष यह दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं कि प्रवर समिति ने मूल बिल पर विचार नहीं करके विभागीय बिल पर विचार-विमर्श किया था और ऐसा उन्होंने आपके द्वारा तथ्यों का निष्कर्ष निकालने और नियमों का हवाला देने, कि मूल बिल पर प्रवर समिति द्वारा विचार किया गया था, के बाद किया है। अब मैं आपके आदेश के बारे में जानना चाहता हूँ।
माननीय अध्यक्षः मैं इस तर्क को सुन रहा हूँ और मैं समझता हूँ कि वे अपने संशोधन के बारे में बात कर रहे हैं कि रायशुमारी के लिए बिल को परिचालित किया जाए और उनका दूसरा संशोधन प्रवर समिति के समक्ष पुनः प्रस्तुतिकरण के लिए है। अतः, यद्यपि मेरा आदेश भी लागू है, मैं सोचता हूँ, वह यह सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि जोगेन्द्रनाथ मंडल द्वारा लाए गए मूल बिल में, उसकी विषय-वस्तु के साथ-साथ उद्देश्य में पर्याप्त ऐसे अंतर विद्यमान हैं, कि उन्हें अब पुनः परिचालित किया जाना तथा उन्हें प्रवर समिति को पुनः प्रस्तुत करना आवश्यक है। जहां तक मैं अभी समझ पाया हूँ, उनका तर्क यह है कि प्रथम बिल में राउ समिति का मूल उद्देश्य यह भी कि कानून के विभिन्न भागों को विभिन्न खंडों में रखा जाना चाहिए। इसमें एक खंड को दूसरे खंड से अलग करना संभव था, किन्तु वर्तमान रूप में, जहां सब कुछ मिलाकर एक किया गया है, यह कठिन कार्य है कि उन कुछ भागों को रखा जाए, जिन पर लोग सहमत हैं और अन्य भागों को हटा दिया जाए। जिनसे लोग सहमत नहीं हैं। वह कहां तक सही है, यह एक अलग मुद्दा है। अतः, वह कहते हैं, कि यह आवश्यक है कि रायशुमारी के लिए बिल को पुनः परिचालित करना आवश्यक है। यही वह है, जो मैं अब इसे समझ सका हूँ। मैं नहीं समझता कि वह मेरे नियम के विरुद्ध है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः कभी नहीं श्रीमान्, पूरे दिन में ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैंने आपके आदेश पर प्रश्न किया हो। आदेश कानून के एक बिंदु पर था। वह अत्यंत तकनीकी प्रकृति का था। मेरी नियमापत्ति उन परिकल्पनाओं पर भी, जो स्पष्ट तौर पर सिद्ध नहीं हो सकी थीं।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य अपने तर्क जारी रख सकते हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं पूरी तरह से सहमत हूँ कि मेरा दृष्टिकोण यही था। किन्तु इसमें कुछ और भी है। वास्तव में, मेरा उद्देश्य यह दर्शाना था कि माननीय कानून मंत्री, जो विभागीय बिल के लिए जिम्मेदार हैं, और प्रवर समिति के सदस्यों को विभागीय बिल में किए गए समुचित बदलावों की हू-ब-हू जानकारी नहीं थी, तो क्या