अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 448

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यह कहा जा सकता है कि उन्होंने कानूनन और यह भी कि क्या वास्तव में, उन्होंने दोनों पर समुचित विचार-विमर्श किया था? तकनीकी रूप से अवश्य ही उन्होंने दोनों पर विचार-विमर्श किया था किंतु सोचने वाली बात यह है कि क्या उन्होंने पर्याप्त रूप से विचार-विमर्श किया था? आपके आदेश के आधार पर, जिसके प्रभाव को मैं सादर स्वीकार करता हूँ, कानून का एक मुद्दा होने के कारण इस पर प्रश्न नहीं उठ सकता। परन्तु मैं जिस बार पर जोर दे रहा हूँ कि यद्यपि उन्होंने दोनों पर विचार-विमर्श किया, उन्होंने वस्तुतः सामने आई कठिनाई भी झेली कि उन्हें एक ऐसा बिल मिला था, जिसके बारे में कहा गया था कि यह मूल बिल का मात्र एक पुन तैयार प्रारुप और धाराओं की एक पुनर्व्यवस्था है, जिसके बारे में यह गारंटी व्यक्त की गई थी कि इसमें कोई बड़े बदलाव नहीं किए गए थे, तब भी वास्तव में बड़े बदलाव किए भी गए थे। मेरा तर्क यह है कि यद्यपि तकनीकी रूप से प्रवर समिति ने मूल बिल तथा विभागीय बिल दोनों पर विचार-विमर्श किया था, देखने वाली बात यह है कि, उन्होंने यह खुलासा नहीं किया कि इन बदलावों पर कोई समुचित अर्थात् पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया और न कर सके। अतः मेरा उद्देश्य बिल को वापस प्रवर समिति को भेजे जाने अथवा परिचालित करने का मुद्दा तैयार करना है।

विभागीय समिति द्वारा किया गया अगला बदलाव धारा 2, उप-धारा (4) में महत्वपूर्ण प्रकृति का है। यहां उल्लिखित बदलाव विभागीय समिति द्वारा किया गया था। यह बदलाव बिल्कुल नया है और यह मूल बिल में शामिल नहीं है और एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह बदलाव बिल में विभागीय समिति द्वारा किया गया था, प्रवर समिति द्वारा नहीं। यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य भी है। विभागीय बिल में व्यवस्था है किः-

‘‘2(4). विशेष विवाह अधिनियम, 1872 (1872 का III ) में निहित प्रावधानों के होते हुए भी, यह संहिता उन सभी हिंदुओं पर लागू होगी जिनका विवाह इस संहिता के आरंभ से पूर्व उक्त अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत संपन्न हुआ था।’’

मूल बिल में ऐसा कुछ भी निहित नहीं था और मूल बिल में यह तथ्य छोड़ दिया गया था कि जिनका विवाह 1872 के विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत संपन्न हुआ था, वे उस अधिनियम द्वारा शासित होंगे। इस प्रकार तलाक, भरण-पोषण और अन्य प्रावधान उन पर लागू होंगे जिनका विवाह उक्त अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत हुआ था वे विशेष विवाह अधिनियम, 1872 के प्रावधानों द्वारा शासित होंगे, जो पूरी तरह भिन्न है। वर्तमान संहिता से यह कितना भिन्न है, यह बात यहाँ ज्यादा विचारणीय नहीं है। तथापि वर्तमान उप-धारा में यह बताने की चेष्टा है कि विशेष विवाह अधिनियम, 1872 के अंतर्गत संपन्न हुए विवाह, जो इस संहिता के प्रभाव होने से पूर्व संपन्न हुए थे, वे विशेष विवाह अधिनियम द्वारा शासित न होकर, अब इस संहिता द्वारा शासित होंगे। मेरा कहना है कि विभागीय बिल में किया गया यह एक बड़ा अंतर या बदलाव है और इसे प्रस्तुत