अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 449

434 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

विभागीय समिति ने किया था और इसने प्रवर समिति कार्य प्रणाली के तौर पर मात्र इसकी स्वीकृति दी थी। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव था, भले ही यह अच्छा था अथवा बुरा, भले ही यह सदाशयी था अथवा नहीं, प्रश्न यह नहीं है। किन्तु यह एक महत्वपूर्ण बदलाव था, जो विभागीय समिति द्वारा किया गया था किन्तु प्रवर समिति को इस बदलाव के बारे में विशेष रूप से सूचित नहीं किया गया था। यद्यपि मूल बिल की धाराओं के संदर्भ आदि हाशिये में दिए गए हैं, तो भी यह उप-धाराएं एकदम नई हैं और उन में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि ये बदलाव फलस्वरूप हैं। उप-धाराओं में भी बदलावों का कोई संकेत नहीं है। वास्तव में प्रवर समिति द्वारा जारी साधारण बिलों में सभी बदलाव या तो अंडरलाइन करके अथवा हाशिये में डालकर किए जाते थे। प्रवर समिति ने उल्लेख किया है कि यह प्रक्रिया अनावश्यक है, क्योंकि छोटे-मोटे संदर्भ में दिए गए हैं। मेरा कहना है कि छोटे-छोटे संदर्भ केवल धाराओं में हैं, किन्तु यह उप-धारा (4) बिल्कुल नई है। इस उप-धारा का संदर्भ, भाग I, उपभाग 6, पृष्ठ 2 और अनुसूची I, पृष्ठ 30 है। लेकिन किए गए परिवर्तन न तो इसमें संदर्भ द्वारा दर्शाए गए है और न ही इसके लिए कोई उपयुक्त व्यवस्था की गई है। वस्तुतः यह एक महत्वपूर्ण प्रकृति का बदलाव था और किसी भी तरीके से प्रवर समिति के विशेष ध्यान में इसे नहीं लाया गया, न ही बदलाव की प्रकृति का उल्लेख किया गया। यह बदलाव नं. 2 था। मैं बड़े तथा महत्वपूर्ण बदलावों का भी बात कर रहा हूँ। ऐस और कई बदलाव हैं। अतः उम्मीद करता हूँ कि भविष्य में सदस्यों के साथ-साथ आम जनता को भी प्रकाशित रूप में ये सभी उपलब्ध होंगे, जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विभाग द्वारा कौन से वास्तविक बदलाव किए गए थे और प्रवर समिति द्वारा वास्तव में कौन से बदलाव किए गए थे। मैं पुनः जोर देना चाहता हूँ कि प्रवर समिति ने कुछ ही बदलाव किए और सर्वाधिक बड़े बदलाव प्रारूप समिति द्वारा किए गए थे।

मैं अब बिल के दूसरे भाग पर आता हूँ। मूल बिल में, भाग I, धारा 3 में पुराने रीति-रिवाजों और प्रथाओं के संबंध में संहिता में लाए जाने का वर्णन है, जिसमें कहा गया हैः

‘‘इस संहिता में किसी भी मामले के पालन के संबंध में इसके प्रावधान ऐसे किसी रिवाज अथवा प्रथा का स्थान ले लेंगे जिन्हें यहां विशेष रूप से नहीं दर्शाया गया है।’’

मूल बिल केवल ऐसे रीति-रिवाजों अथवा प्रथाओं का स्थान लेगा जिन्हें यहां विशेष रूप से नहीं दर्शाया गया है। ऐसे सभी रीति-रिवाज जिन्हें मूल बिल द्वारा विशेष रूप से मान्यता प्रदान नहीं की गई है, हटा दिए जाएंगे। अब आइए हम विभागीय बिल के तुलनात्मक प्रावधानों को भी देख लें जिन्हें प्रवर समिति ने बिना कोई प्रश्न किए स्वीकार कर लिया था। अतः मैं यही बताना चाहता हूँ कि बदलाव विभागीय समिति द्वारा किया गया था, प्रवर समिति द्वारा नहीं। विभागीय बिल में, धारा 4, अंतिम रूप से तैयार बिल