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की धारा 4 के समान ही है। इसमें मामूली अंतर संहिता का ओवर राइडिंग प्रभाव’ है, जो काफी अलग है, किन्तु मैं इस पर जोर नहीं देता, क्योंकि यह बिल का हिस्सा नहीं है। विभागीय बिल में कहा गया हैः
‘‘कोई मूल-पाठ अथवा नियम अथवा हिंदू कानून की व्याख्या अथवा रीति अथवा प्रथा अथवा इस अधिनियम के गठन से तत्काल पूर्व लागू कोई अन्य कानून, जो इस संहिता में स्पष्ट तथा दिए गए प्रावधान के अन्यथा हो, इस संहिता के द्वारा निपटाए जाने वाले किसी भी मामले में, अपना प्रभाव समाप्त कर देंगे।’’
मौखिक बदलाव महत्वपूर्ण नहीं होते, परन्तु क्या आप कृपया उन अनेक महत्वपूर्ण नए मामलों पर विचार करेंगे जो विभागीय समिति द्वारा प्रवेश कराए गए हैं। यथा, ‘हिंदू कानून का कोई मूल-पाठ, नियम अथवा व्याख्या’ और इसके बाद ‘इस संहिता के गठन से तत्काल पूर्व लागू कोई अन्य कानून’ बिल्कुल नए हैं। सदन एक मिनट रुक कर बदलाव की इस गंभीरता पर विचार करे। सभी रीति-रिवाज और प्रथाएं जिन्हें मूल बिल द्वारा विशेष मान्यता नहीं दी गई है, बिल्कुल समाप्त हो जाएंगी। किंतु विभागीय बिल अपने कानून में हिंदू कानून के किसी मूल-पाठ, नियम अथवा व्याख्या को शामिल करेगा। यह सब ऐसा है जो प्रथा और रिवाजों से पूर्णतया भिन्न हैं। वास्तव में पवित्र पुस्तकों, वेदों और स्मृतियों, हिंदू कानून का कोई नियम अथवा व्याख्या, जिसके बारे में कहें, उच्च न्यायालयस, फेडरल कोर्ट और प्रिवी काउंसिल के सभी नियम, संस्कृत के मूल-पाठों की सभी अधिकारिक व्याख्याएं अथवा उच्चतम न्यायिक प्राधिकरणों द्वारा की गई व्याख्याओं को नष्ट हो जाना चाहिए, साथ ही इस संहिता के गठने से तत्काल पूर्व लागू किसी अन्य कानून को भी समाप्त कर दिया जाना चाहिए। हमारे पवित्र मूल-पाठ और डेढ़ सो से अधिक वर्षों बनाए गए कानून, कलम के जरा से झटके से एक साथ समाप्त हो जाएंगे। ‘किसी भी मूल-पाठ, नियम अथवा हिंदू कानून की व्याख्या’ में संभवतः सभी कुछ शामिल है। ‘इस संहिता के गठन से तत्काल पूर्व लागू कोई अन्य कानून’ भी संभवत इस पाठ में शामिल किया जाएगा। किन्तु मैं कहता हूँ कि विभागीय बिल का यह पाठ यदि मुझे यह कहने की अनुमति दी जाए, सभी मूल-पाठों, हिंदू कानून की व्याख्या अथवा ऐसे नियम जो विशेषकर बिल के द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हैं, वे सब समाप्त हो जाएंगे। मेरा कहना है कि यह एक बड़ा परिवर्तन होगा।
श्रीमती जी. दुर्गाबाई (मद्रासः सामान्य)ः मुझे आपत्ति है कि माननीय सदस्य ने अपने अधिकारों के भीतर आपके नियमों की सक्षमता पर प्रश्न उठाया हे। जब वह इस बिल को विभागीय बिल कहते हैं तो वह प्रवर समिति के सदस्यों के विरुद्ध बहुत बड़ा कटाक्ष करते हैं। प्रवर समिति के सदस्यों ने बिल का पूरा अध्ययन किया है और उन्होंने बदलावों पर ध्यान दिया है। इन्हें इसे ‘विभागीय बिल’ का संदर्भ देकर इस बिन्दु पर अधिक बहस नहीं करनी चाहिए। हम आपका आदेश चाहते हैं कि क्या वह सही बातेंं कर रहे हैं?