हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 45

30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के मसौदे पर दिया गया था तो उन खंडों पर विचार नहीं होता। यह एक तकनीकी विषय नहीं है।

माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य इस बात से अवगत हैं कि प्रवर समिति ने जो कुछ भी किया है, उससे यह सदन बाध्य नहीं है। प्रवर समिति ने एक सिफारिश भेजी है_ यह मान्य सदस्य पर है कि वह उसे स्वीकार करे या न करे। यदि वह स्वीकार नहीं करता तो वह प्रयास कर सकता है कि सदन उसे न स्वीकारें। हमें इस बात पर फिर विचार नहीं करना है, आखिरकार कुछ सदस्य वहां उपस्थित थे। यह सही नहीं है वहां जाना कि उन्होंने क्या विचार किया अथवा क्या विचार नहीं किया। उसके लिए माननीय सदस्य इस सदन को संबोधित करना चाहेंगे कि हम क्यों किसी प्रावधान को स्वीकर न करें अथवा हमें उसे स्वीकारना चाहिए।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः श्रीमान, मैं आपके परामर्श को स्वीकार करता हूँ। मैं इस बात का भविष्य में उल्लेख नहीं करूंगा कि प्रवर समिति के समक्ष क्या हुआ। मैं आपकी अनुमति से सिर्फ यह बात कहूँगा। चाहे प्रवर समिति की संलिप्तता इस जालसाज़ी में हो कि मूल विधेयक पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है, बाध्य नहीं है। यदि एक अभियोगी फौजदारी अदालत के सामने किसी ऐसी प्रक्रिया से सहमति प्रकट करे जो अवैध है_ तब वह उस पर बाध्य नहीं है। क्या मैं कुछ आदेशों को उद्धृत करूं। न्यायालय को इस प्रश्न पर विचार करने की आवश्यकता है और स्वयं यह पता करने की आवश्यकता है कि क्या किसी अभियोगी को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 के अधीन बाध्य करने के लिए ठोस साक्ष्य अथवा अभिलेख हैं। अभियोगी कहता है, ‘मैं उस साक्ष्य में बाध्य होने के लिए सहमत हूँ।’ तो न्यायालय कहता है, ‘आप बाध्य हैं’। परन्तु अपील सुनने वाला न्यायालय यह आदेश दे सकता है कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है, और गलत प्रक्रिया में अभियोगी की सहमति आदेश को वैध नहीं बनाती।

माननीय उपाध्यक्षः क्या माननीय सदस्य प्रवर समिति की रिपोर्ट फाड़कर टुकड़े-टुकड़े करते हुए संतुष्ट हैं? क्या वे कहना चाहेंगे कि वे ‘अभियोगी’ हैं?

पंडित ठाकुर दास भार्गवः जो सदस्य ऐसी प्रक्रिया के सैद्धांन्तिक नियमों की, जो प्रवर समिति को शासित करते हैं, अवहेलना करने के दोषी हैं और आज इस सदन के समक्ष अभियोगी हैं। मुझे दुख है मैं कुछ कहना है जो मेरे मित्रों को अच्छा नहीं लगे, परन्तु मुझे अति विनम्र भाव से ऐसा करना है। सदन के अधिकारों की रक्षा और प्रतिष्ठा की दृष्टि के साथ अब मैं यह बात छोड़ता हूँ और दूसरी बात पर आता हूँ।

विवाह और तलाक के संबंध में जो अधिक महत्व के विषय हैं, उनके बारे में संहिता क्या कहती है और आज इस बारे में क्या तथ्य है? पंजाब में उन विवाहें के लिए किन्हीं विशेष प्रकार के उत्सव मनाने की आवश्यकता नहीं है जिन्हें करेवा और चादर और