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अंदाजी विवाह कहते हैं। उनमें महिला, पति द्वारा दी गई चूडि़यां पहनती है अथवा पति अपनी पत्नी को चादर उढ़ाता है और विवाह सम्पन्न हो जाता है। ( श्री महावीर त्यागीः ‘चार्मिंग मेरिज’) श्री त्यागी के लिए यह अति सरल है कि वह स्वयं इस प्रक्रिया को अपना लें। यह न तो सांस्कारिक विवाह है और न सिविल मैरिज (कानूनी विवाह) है। पुनः मूल संहिता में एक बचाव का रास्ता भी था। ऐसे व्यक्ति अदालत में जा सकते थे और वे अपने विवाह का पंजीकरण करा सकते थे। परिवर्तित नियमों में जब तक विवाह सांस्कारिक है, उसका पंजीकरण नहीं हो सकता। कुछ अन्य बातें भी हैं, जिनके बारे में मैं आपके समक्ष अवसर होगा कहने का, परन्तु मैं इस विषय में सामान्य टिप्पणियां करना चाहूँगा कि अनेक व्यक्तियों के बारे में क्या हो रहा है और आम आदमी की दृष्टि से किस पर विचार नहीं किया गया है।
मुफस्सिल क्षेत्रों के लोग निरक्षर हैं। वे गरीब हैं। वे कानून की पेचीदगियों को नहीं जानते। तलाक के प्रश्न पर जब डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वे नब्बे प्रतिशत जनसंख्या की बात कह रहे थे। मैं जानता हूँ कि और कुछ नहीं बल्कि सत्य कह रहे थे। आज तलाक किस प्रकार होता है? वे अर्जी लेखक के पास जाते हैं और छुटकारा का पत्र ले लेते हैं। दूसरा विकल्प यह है कि वे एकत्र हो जाते हैं और महिला पर श्वेत चादर उढ़ा देते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः और एकत्रित व्यक्तियों में पर्याप्त मात्रा में मदिरा बाँट देते हैं।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः परन्तु यह धर्मानुष्ठान का हिस्सा नहीं है। श्रीमान, इस समय का कानून क्या है? हमारे नेताओं ने आपके लिए किया क्या है? मैं उन गरीब लोगों का प्रतिनिधि हूँ। मैं स्वयं को उनमें शामिल समझता हूँ। परन्तु जब डॉ. अम्बेडकर अपनी उंगली से ऐसा संकेत देते हैं कि वे भी उनमें से एक हैं, तो वे मुझे क्षमा करेंगे कि मैं उनके साथ सहमत न होऊँ। डॉ. अम्बेडकर तो यहां स्वर्गतुल्य महल में रहते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं कई वर्षों तक ‘इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट’ की चालों में रहा हूँ, मुझसे तीन रुपए किराया वसूलते थे।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः आप उन्हें अपने पैरों तले कुचल सकते हैं। आप उन्हें अपने अंगूठे के नीचे रख सकते हैं। परन्तु श्रीमान, क्या आप यह सोचे सकते हैं कि कोई गांव वाला प्रतिदिन लगभग एक रुपया अथवा डेढ़ रुपये प्राप्त करता है, वह किसी अधिवक्ता की सहायता के बिना, सीधा न्यायाधीश के पास पहुंच सकता है? डॉ. अम्बेडकर एक अधिवक्ता हैं। वे चाहते हैं कि सारा विश्व सिर्फ उनके समान अधिवक्ताओं से भर जाए और दूसरा कोई भी न हो। ऐसी स्थिति में इन लोगों का क्या होगा? क्या वे अपने विवाह-विच्छेद यानी तलाक के लिए जिला न्यायाधीश के पास पहुंच सकेंगे? ( एक माननीय सदस्यः ‘असंभव’।)