अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 457

442 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमदः इतने चिंतित क्यों हो रहे हैं? इसी के बारे में क्यों नहीं सुनना चाहते?

माननीय अध्यक्षः कृपया शान्त रहिए। इस तरीके से हम विधेयक पर विचार-विमर्श जारी नहीं रख सकते। कुछ ऐसे सदस्य हैं जो विधेयक का समर्थन करना चाहते हैं, और कुछ उसका विरोध करना चाहते हैं। प्रत्येक को अपने तरीके से अपनी बात कहते दें, बस कोई अप्रिय बात न कहें अथवा अससंदीय भाषा का प्रयोग न करें। आपत्ति केवल यही है। अन्यथा, प्रत्येक चरण में बाधा उत्पन्न होगी और जो विधेयक का समर्थन करना चाहते हैं, आगे चलकर उन्हें कष्ट होगा, क्योंकि इस तरह की अनावश्यक चर्चा में समय व्यतीत हो जाएगा। माननीय सदस्य अपनी बात रख सकेंगे और यदि वह कहते हैं कि प्रवर समिति ने इस बात पर अथवा उस बात पर ध्यान नहीं दिया अथवा प्रवर समिति ने इन तथ्यों की जांच नहीं की, इसमें बेइज्जती का आधार कहाँ बनता है? वह पूर्ण रूप से ऐसा कहने के पात्र हैं। किन्तु उन्हें कोई ऐसा आक्षेप नहीं करना चाहिए_ यह वह है, जिसकी मुझे रक्षा करनी पड़े। परन्तु मुझे यकीन है, वह अपने विचार व्यक्त करने के पात्र हैं।

एक अन्य तथ्य भी है, जिसके संबंध में मैं माननीय सदस्य का ध्यानाकर्षित करने जा रहा हूँ। उनका कहना है कि चूंकि कानून मंत्री को महत्वपूर्ण परिवर्तन की जानकारी नहीं थी, अतः वह परिवर्तन किसी अन्य द्वारा किया गया था। इसका एक अन्य पहलू भी है। जिस तथ्य को वह महत्वपूर्ण मानते हैं, पर यदि कानून मंत्री उसे महत्वपूर्ण नहीं मानते, तो माननीय कानून मंत्री उचित रूप से यह कहने के पात्र हैं कि उन्हें किसी महत्वपूर्ण परिवर्तन की जानकारी नहीं थी। अतः इसका निश्चित रूप से यह आशय नहीं है कि किसी अन्य व्यक्ति ने अनजाने में अथवा मंत्री जी के पीठ पीछे, इसे प्रवर समिति में प्रस्तुत कर दिया था तथ्यों को महत्वपूर्ण रहने दें और इस विवाद को इस प्रश्न तक समिति रहने दें कि क्या तथ्य महत्वपूर्ण हैं अथवा नहीं। मेरा विश्वास है कि विवाद का मुख्य बिन्दु भी यही है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं इस बारे में सुधार का पक्ष लेता हँ। जैसा हो सकता है कि कानून मंत्री द्वारा यह जाने बिना और यह विश्वास किए बिना कि यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। किंतु मुद्दा यह है कि वास्तव में स्थिति क्या थी। ये महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, चाहे वे परिवर्तन कानून मंत्री द्वारा होशो-हवास में किए गए अथवा किसी अन्य द्वारा अनजाने में, किसी भी तरीके से किए गए। हमारे लिए उस पर बहस करना उचित न होगा। किंतु जरा सी एक कलम चलाकर, हिंदू कानून के सभी मूल-पाठ नियम और व्याख्याएं समाप्त कर दी गई हैं। इसका प्रभाव यह पड़ेगा कि प्रिवी काउंसिल, फेडरल कोर्ट और उच्च न्यायालय के सभी नियम, कलम के एक झटके के कारण खत्म हो जाएंगे। वास्तव में, यदि यह मूल विधेयक में गंभीर हस्तक्षेप नहीं कर रहा, तो मैं नहीं