अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 458

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जानता वह क्या कर रहा है? हमारे मतभेद हो सकते हैं। परन्तु यदि कोई बिना किसी भेदभाव, और खुले दिमाग से, इस प्रश्न को समझे, तो मुझसे सहमत होने में उसे कोई कठिनाई नहीं होगी कि मूल विधेयक में यह बहुत गंभीर हस्तक्षेप था।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः कृपया अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तनों के विषय में भी बताएं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह एक गंभीर विषय को बहुत हल्के लेने जैसा है। परन्तु मैं कहता हूँ कि ये बहुत गंभीर परिवर्तन है जो अन्तर्वेशन, सदाशयी अथवा कदाचार, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता?

श्रीमान्, इसके बाद विभागीय समिति द्वारा जो अगली तिकड़म की गई, वह भाग I, धारा 5, उप-धारा (ख) में, जिसमें जाति की परिभाषा का उल्लेख है, उससे ‘जाति’ की परिभाषा को हटाना है। उसे वहाँ से पूर्णतया विलुप्त कर दिया गया है।

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य किस धारा की बात कर रहे हैं?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं भाग II, धारा 5, उप-धारा (ख) का उल्लेख कर रहा हूँ जिसमे ‘जाति’ की परिभाषा है।

माननीय अध्यक्षः क्या आप मूल विधेयक का उल्लेख कर रहे हैं?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः जी हाँ। पर विभागीय विधेयक में उक्त परिभाषा पूर्णतया विलुप्त कर दी गई है और इस विलोपन के बारे में कहीं भी कोई संकेत तक नहीं दिया गया है। मूल धारा में केवल हाशिये में इस विषय में मात्र एक संदर्भ दिया गया है। लेकिन इसकी उप-धारा को विलुप्त कर दिया गया है और इसका कोई संकेत भी नहीं दिया गया है। श्रीमान्, मैं कहता हूँ कि इस विलोपन के बारे में प्रवर समिति का विशेष ध्यानाकर्षण नहीं किया गया है और ये महत्वपूर्ण मुद्दे हैं अथवा नहीं, इस बारे में ज्यादा मतभेद नहीं हो सकता। प्रवर समिति को किसी भी मूल्य पर यह बताया जाना चाहिए था कि ये-परिवर्तन किए गए थे_ वे परिवर्तन महत्वपूर्ण थे अथवा नहीं, यह बात व्यक्ति-व्यक्ति के लिए भिन्न हो सकती है। किन्तु प्रवर समिति को यह जानने का अधिकार था कि ये परिवर्तन किए गए थे। किन्तु उन्हें बताया ही नहीं गया।

ओर अब हम उसी धारा की उप-धारा (च) पर आते हैं और पाते हैं कि वहाँ गौत्र और परिवार की परिभाषा विलुप्त कर दी गई है। इसके पश्चात् उप-धारा (छ) में स्त्रीधन की परिभाषा विलुप्त कर दी गई है। इस प्रकार, जाति की परिभाषा, गोत्र की परिभाषा, परिवार की परिभाषा और स्त्रीधन की परिभाषा, पूर्णतया विलुप्त हो गई हैं। इससे इस विधेयक पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस सदन में इसके संक्षेप में बतलाया नहीं जा सकता।