32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और यह पर्याप्त नहीं है। यदि उसे डिक्री मिल जाती है, तो उसकी पुष्टि उच्च न्यायालय द्वारा होनी चाहिए जो कि जहां तक पंजाब का मामला है, वह कार्य शिमला स्थित उच्च न्यायालय में सम्पन्न किया जाएगा। अब यह प्रक्रिया भी लोगों को मालूम नहीं है, लगता है उन लोगों के लिए बड़ी क्रूरता है। आप उन व्यक्तियों के लिए कानून बना रहे हैं जो बम्बई के मैरीन ड्राइव में रहते हैं अथवा कलकत्ता और दिल्ली के महलों में निवास करते हैं न कि उन लोगों के लिए जिनके लिए आपके हृदय में कोमल भाव है।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः वे इसे कठिन बनाना चाहते हैं। पर क्या आप इसे सरल बनाना चाहते हैं?
पंडित ठाकुर दास भार्गवः इसका दूसरा उत्तर यही है कि वे इसे कठिन बनाना चाहते हैं। मैं तलाक को आसान बनाना नहीं चाहता, बिलकुल भी नहीं। मैं तलाक के पक्ष में केवल एक शर्त के साथ हूँ कि आप ऐसे कानून बनाएं जिसमें वैसी परिस्थितियां बनना बहुत कठिन हो जाएं कि तलाक लिया जा सके। चरित्र तथा पारिवारिक जीवन की प्रवाहिता हमारी संस्कृति की धुरी है। परन्तु यदि मैं तलाक का समर्थन करता हूँ, तो इसका कारण यह है कि मैं अनेक महिलाओं को परित्यक्ता देखता हूँ। उसी कारण से मैं इसके लिए सहमत हूँ। पर एक गरीब आदमी जो नितांत निरक्षर है, किस प्रकार एक अधिवक्ता को नियुक्त कर सकेगा तथा जिला या उच्च न्यायालय में पहुंच सकेगा? यह असंभव है कि इस बात को स्वीकार किया जाए। 1869 पुराना का अधिनियम बनाया गया था, वह पंजाब अथवा भारत के किसी भी भाग के गरीब लोगों के लिए नहीं था। वह अधिनियम ऐसे ईसाइयों के लिए बनाया गया था, जो उसी जाति के थे, जैसे कि उस समय के शासक थे। उनमें तथा इन लोगों में भारी अन्तर है। यदि आप विधेयक के अनुच्छेद 38 से 50 तक के उपबंधों का अध्ययन करें, तो आप इस निष्कर्ष पर पहुँच जाएंगे कि इतनी जटिल और पेचीदा प्रक्रिया बना दी गई है कि उसका अनुसरण कर पाना एक कठिन कार्य है। यदि आप गहराई से विचार करें तो आप पायेंगे कि समग्र हिंदू समाज आपका विरोध करेगा कि आप इन उपबंधों को पारित करते हैं। आपके कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी बुआ की बेटी से विवाह करता है तो ऐसा विवाह ठीक है। यदि वह अपने मामा की पुत्री के साथ विवाह करता है, जैसा कि यह मुम्बई के कुछ भागों में प्रचलित है, तो मैं समझता हूँख्...,( एक माननीय सदस्यः ‘और मद्रास।’ परन्तु जहां तक हमारा संबंध है, इसे हम निकट कौटुम्बिक व्यभिचार मानते हैं। इसमें काफी अन्तर है। ( श्री महावीर त्यागीः ‘उस व्यक्ति की हत्या भी की जा सकती है।’) श्री त्यागी सत्य से बहुत अधिक दूर नहीं हैं। यह तथ्य है कि पूर्वी पंजाब के सभी जिलों मेंµऔर मैं ऐसी भावना से इसलिए नहीं कि मैं बलपूर्वक कहना चाहता हूँ बल्कि इसे मैं सत्य समझता हूँ यदि आप उन्हें होने दें कि वहाँ पुरुष को मार दिया जाएगा और कोई भी और व्यक्ति उसका साथ नहीं देगा। ( श्री तजामुल हुसेनः क्या वहाँ कोई दबाव है?) यदि कोई पुरुष अपनी बहन अथवा