447
कर रहे हैं या ऐसे तर्क दे रहे हैं, जो सम्बोधित सदस्य को पसंद नहीं आ रहे। फिर भी, एक हद तक धैर्य रखा जाना चाहिए। किसी शब्द के द्वारा अथवा किसी इशारे द्वारा कोई बाधा उत्पन्न नहीं की जानी चाहिए। इसी प्रकार, यदि माननीय सदस्य अपने दस्तावेजों के कुछ पृष्ठ पलट रहें हों, और वे उन्हें बाधा पहुंचते तो वह अपनी बात भूल सकते हैं और वह बाधा उन्हें उत्तेजित कर सकती है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान्, मुझे कहीं से यह टोका गया था कि मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है।
माननीय अध्यक्षः लगता है माननीय सदस्य अब अपना सूत्र खोने लगे हैं- अपने तर्क का सूत्र।
श्री तजामुल हुसैनः क्या मैं जान सकता हूँ कि वह अपना पवित्र धागा यानी सूत्र
खो चुके हैं?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं अपने तर्कों को आगे बढ़ाता हूँ, श्रीमान्। मूल विधेयक की धारा 2 हमें ‘पुत्र’ की परिभाषा दी गई है। वहाँ ‘पुत्र’ में एक ‘दत्तक कृत्रिम’ अथवा ‘गोद लिया पुत्र’ आदि शमिल हैं, किंतु उसमें कोई दासी पुत्र आदि शामिल नहीं हैं। विभागीय विधेयक में इसे इसी तरह माना गया है।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः जब कोई माननीय सदस्य कुछ पढ़ते हैं, तो क्या उन्हें सही बात नहीं पढ़नी चाहिए?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैंने देख लिया है कि इसे हटा दिया गया है। यदि इसका उल्लेख परिभाषा में अथवा विधेयक के किसी अन्य भाग में मिले, तो कृपया मेरे ध्यान में ला दिया जाए।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य, जिन्होंने अभी वक्ता को अपनी बात कहने से रोका है, बार-बार अपनी सलाह दे रहे हैं। श्री नजीरुद्दीन अहमद जो भी संदर्भ आगे देना चाहें, उससे थोड़ा धीमी गति हो सकती है उन्हे रोके जाने की आवश्यकता नहीं है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरा कहना है कि ‘पुत्र’ की परिभाषा विलुप्त कर दी गई है। यदि मैं गलत हूँ तो वह गलती मुझे बताई जाए।
डॉ. पी.एस. देशमुख (सी.पी. एवं बरारः सामान्य)ः मैं समझता हूँ कि माननीय सदस्य गलत हैं।
माननीय अध्यक्षः यदि माननीय सदस्यगण इसी तरह बाधा उत्पन्न करते रहेंगे तो सदन की कार्रवाई नियमानुसार चलाना असंभव हो जाएगा। श्री नजीरुद्दीन अहमद माननीय सदस्यों से कोई प्रश्न किए बिना अपनी बात जारी रखें।