अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 467

452 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री बी. दासः हम आपस में बातचीत कर रहे हैं।

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य को उस समय बातचीत का कोई अधिकार नहीं है कि जब एक माननीय सदस्य अपनी बात कहने के लिए खड़े हैं। अतः उस समय उन्हें बाधा नहीं पहुंचाई जानी चाहिए।

श्री बी. दासः वह हम से बात कर रहे हैं।

श्री माननीय अध्यक्षः आपको बातचीत नहीं करनी चाहिए। जब कोई माननीय सदस्य बोल रहा हो, तो अन्य माननीय सदस्यों को बातचीत नहीं करनी चाहिए। उन्हें सुनना चाहिए और सदन में शोर-शाराबा भी नहीं करना चाहिए।

श्री बी. दासः आप भड़काना समझ सकते हैं। मैं स्वयं यहां से बाहर जाने को तैयार हूँ, किन्तु माननीय सदस्य को अपने भाषण से सदन के सदस्यों को भड़काना नहीं चाहिए।

माननीय अध्यक्षः यह गलत है। किसी भी माननीय सदस्य के भाषण को तब तक भड़काऊ नहीं कहा जाना चाहिए। जब तक कि वह अपशब्दों अथवा असंसदीय भाषा का प्रयोग न करें। हम चाहे सहमत हों अथवा न हों, किंतु माननीय सदस्य सदन के समक्ष अपनी बात रख रहे हैं। किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह एक माननीय सदस्य के भाषण को भड़काऊ कहे।

श्री बी. दासः मैं आपके निर्णय को स्वीकार करता हूँ। किन्तु उन्होंने कानून मंत्री के लिए ‘धोखेबाज’ जैसे शब्द का प्रयोग किया है।

माननीय अध्यक्षः माननीय कानून मंत्री स्वयं इतने सक्षम हैं कि वह अपना ध्यान रख सकते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि माननीय सदस्यों को मूल धाराओं की तुलना करनी चाहिए।

माननीय अध्यक्षः क्या कोई ऐसे सारगिर्मित मामले भी हैं, जिनके द्वारा माननीय सदस्य को अपना मन बदलने के लिए प्रेरित कर सकें?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं। मुझे इन बातों को उजागर करना होगा। वास्तव में, मुझे बड़ी संख्या में उदाहरण देने होंगे। सबसे बेहतर यह होता कि गलतियों को मान लिया जाता अथवा धैर्य रखकर सुना जाता। मुझे सभी मुद्दों को बताना चाहिए और यदि मैं अपने तर्क को दोहराता हूँ अथवा असंबद्ध हो जाता हूँ, तो नियमानुसार कहने को कहा जा सकता है। भाग II, की धारा-5 में श्रेणी I, में पुत्रों, विधवाओं और पुत्रियों का हवाला है। विभागीय समिति द्वारा इसमें एक परिवर्तन किया गया है। विभागीय विधेयक की सातवीं अनुसूची में श्रेणी I, के तुलनात्तक भाग में एक उत्तराधिकारी पुत्र के उत्तराधिकारी पुत्र के पुत्र को नए तरीके से शामिल किया गया है।