अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 468

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वास्तव में, मूल विधेयक से इस अनुसूची को अपने स्थान से इस प्रकार हटाया गया है कि जब तक दोनों श्रेणियों को साथ-साथ न रखा जाए, तब तक परिवर्तन के बारे में पता लगाना सरल नहीं है। प्रस्तुत अधिनियम में, एक पूर्व मृत पुत्र के पूर्वमृत पुत्र के पुत्र को मूल विधेयक में स्थान नहीं दिया गया है। किन्तु उसे विभागीय समिति द्वारा संशोधित विधेयक की सातवीं अनुसूची में शामिल किया गया है।

इसके बाद हम अन्य सूचियों पर आते हैं। मूल विधेयक में उल्लिखित उत्तराधिकारी के बाद मद सं. 2 में पुत्री सूची में प्रथम है। लेकिन विभागीय विधेयक में, पुत्री के पुत्र को नीचे खिसका दिया गया है। तत्पश्चात् पिता और माता पर ते हैं। मूल विधेयक के अनुसार, पिता की तुलना में माता को उत्तराधिकार का पात्र होना चाहिए था। जबकि विभागीय विधेयक में पिता और माता को एक साथ रखा गया है और वहाँ उनका क्रम भी बदल दिया गया है और विभागीय विधेयक के अंतर्गत उन्हें एक साथ उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया है, जब कि मूल विधेयक के अंतर्गत पिता को शामिल किए जाने से पूर्व माता को उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया था। वहाँ माता के न होने की स्थिति में ही पिता को उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया था। जैसा कि पहले भी बताया गया है पुत्री के पुत्र को, विभागीय सूची में और नीचे कर दिया गया है। किसी को भी, जो इस मामले पर विचार करना चाहता है, अब इस बारे में सुस्पष्ट हो जाना चाहिए कि ये सब महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं।

अब हम मूल विधेयक की तृतीय श्रेणी पर आते हैं। भाई के पुत्र जो मूल विधेयक में तृतीय श्रेणी की सूची में प्रथम था, उसे विभागीय विधेयक में पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया है। यदि ऐसा जानबूझ कर किया गया था, तब हमें प्रवर समिति की रिपोर्ट में अथवा उसके भाषणों में तत्संबंधी संकेत प्राप्त होना था। मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं था? यह उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण भले न हो, जो भाई के पुत्र का पुत्र नहीं है, किन्तु एक भाई के पुत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है, क्योंकि अन्य उत्राधिकारी के न होने की स्थिति में वह सम्पत्ति का उत्तराधिकारी हो जाएगा।

सूची में अगला आने वाला सदस्य है, बहन। विभागीय बिल में भाई और बहन को उत्तराधिकार में एक साथ रखा गया है। मूल विधेयक की सूची में भाई का नाम बहुत ऊपर था, उसे अब स्थानांतरिक करके नीचे तृतीय श्रेणी में कर दिया गया है और उत्तराधिकार में बहन के साथ ही रख गया है (हस्तक्षेप)।

क्या मैं अपनी बात समाप्त कर दूं?

श्री तजामुल हुसैनः माननीय सदस्य को किसी अन्य माननीय सदस्य से बात करने का अधिकार नहीं है। श्रीमान् मैं इसका बड़ा विरोध करता हूँ।