अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 469

454 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री लक्ष्मीनारायण साहू (उड़ीसाः सामान्य)ः ऐसा प्रतीत होता है कि यहां कोई कोरम नहीं है।

माननीय अध्यक्षः यहाँ कोरम है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मान लिजिए किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका एक भाई और एक बहन जीवित हैं। मूल विधेयक के अनुसार भाई को उत्तराधिकार दिया जाता तो बहन को उसके लाभ से दूर रखा जाता। किन्तु विभागीय विधेयक में भाई और बहन को समान उत्तराधिकार दिया गया है। अब भाई की सूची में शामिल अन्य 11 संबंधियों के स्थान से नीचे बहन के साथ रखा गया है। मेरा कहना है कि इसमें बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है।

अब हम भाई के पुत्र पर आते हैं। वह श्रेणी- I बहुत उच्च स्थान पर था। पर विभागीय विधेयक में बहन के पुत्र के साथ रखा गया है। यदि कोई मृत व्यक्ति अपने पीछे अपने भाई का पुत्र और अपनी बहन का पुत्र छोड़ जाता है, तो मूल विधेयक के अंतर्गत, भाई के पुत्र को उत्तराधिकार मिलेगा, किंतु विभागीय विधेयक के अंतर्गत भाई के पुत्र और बहन के पुत्र को समान उत्तराधिकार मिलेगा। मेरा कहना है कि ये बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं।

इसके बाद मैं मूल विधेयक की श्रेणी- IV पर आता हूँ। मूल विधेयक की श्रेणी- IV में यदि किसी मृत व्यक्ति के पीछे उसके पिता की माँ और पिता का पिता जीवित रहते हैं, तो उन्हें मूल विधेयक और विभागीय विधेयक में भिन्न रूपों से रखा गया है। मूल विधेयक में पिता की माँ और पिता के पिता को उत्तराधिकारी के रूप में रखते हुए, पिता की माँ और पिता के पिता को उत्तराधिकारी के रूप में रखते हुए, पिता की माँ को प्राथमिकता दी गई थी, पिता के पिता को तरजीह नहीं दी गई थी। परन्तु विभागीय विधेयक में दोनों को एक साथ रखा गया है और दोनों को एक साथ ही उत्तराधिकार दिया गया है। मैं पूछता हूँ कि क्या यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं है।

तत्पश्चात् श्रीमान, श्रेणी- IV में मद (1क), (1ख), (1ग), और (1घ) में इनकी प्रविष्टि राउ समिति द्वारा मूल रिर्पोट में संशोधन द्वारा की गई थी। मूल बिल में, यदि पिता की कोई विधवा थी और भाई की कोई विधवा थी, तो भाई की विधवा की तुलना में पिता की विधवा को प्राथमिकता दी गई थी। विभागीय बिल में पिता की विधवा और भाई की विधवा को एक साथ उत्तराधिकार दिया गया है। मेरा कहना है कि यह एक बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन है - भले ही यह अच्छा हो अथवा बुरा, यहाँ मुद्दा यह नहीं है। इसके बाद राउ समिति द्वारा संशोधन के रूप में सामने आई पूरक सूची में शामिल दो अन्य उत्तराधिकारियों की बात करें तो भाई के पुत्र की विधवा और भाई के पुत्र के पुत्र की विधवा को विभागीय विधेयक में पूरी तरह से हटा दिया गया है। जब कि मूल बिल में उन्हें एक के बाद एक