अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 470

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उत्तराधिकार दिया गया था। इस तरह विभागीय बिल में उन्हें विलुप्त कर दिया गया है, यानी विभागीय बिल में इसके बारे में कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया।

इसके बाद मद 2 पर आते हैं। श्रेणी- IV में, पिता के पिता को मूल विधेयक में बहुत नीचे रखा गया है, किन्तु विभागीय समिति द्वारा तैयार सूची में उसे बहुत ऊपर कर दिया गया है।

तत्पश्चात्, श्रीमान्, हम पिता के भाई और पिता की बहन की स्थिति पर आते हैं। सूची में पिता का भाई क्रमांक 3 पर है और पिता की बहन क्रमांक 6 पर है। अतः मूल विधेयक में, यदि वहां पिता के पिता तथा अन्य शामिल थे, तो पिता के पिता को प्राथमिकता दी गई थी। इसके बाद पिता का भाई, पिता के भाई का पुत्र, पिता के भाई का पुत्र का पुत्र और तत्पश्चात् पिता की बहन आते हैं। विभागीय बिल में पिता के पिता और पिता की बहन को एक स्तर पर रखा गया है, इस तरह बाद वाले को ऊपर लाया गया है।

इसके बाद उत्तराधिकारियों की एक बड़ी सूची है, जिसे पूरी तरह विलुप्त कर दिया गया है। मूल विधेयक में क्रमांक (4), (5), (7) और (8) उत्तराधिकारी हैं। विभागीय विधेयक में उनका कहीं उल्लेख नहीं है, उन्हें पूरी तरह से हटा दिया गया है।

श्रीमान्, मैं जानता हूँ कि इस सबका उल्लेख करना एक थकाने वाला कार्य है, परन्तु मैं अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ और मैंने प्रत्येक सदस्य को तुलनात्मक विवरण की प्रति सौंपने का कार्य हाथ में लिया है, जो अभी तैयार हो रही है। मैं सदस्यों से प्रत्येक परिवर्तन की जांच करने का अनुरोध करूंगा और यदि मैं गलत सिद्ध हुआ तो भी मुझे बहुत खुशी होगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं आशा करता हूँ कि प्रति निःशुल्क दी जाएगी।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः यदि सरकार यह सोचती हैं कि में एक धर्मार्थ संस्था हूँ, तो यह आशा पर खरा उतरने में भी मुझे खुशी होगी।

माननीय अध्यक्षः यदि इसकी आपूर्ति पहले कर दी गई होती, तो यह सारा समय बच गया होता!

श्री नजीरुद्दीन अहमदः खेद की बात है कि मेरे मुद्रणालय की हालत सरकारी मुद्रणालय से बदतर ही है।

माननीय अध्यक्षः यदि माननीय कानूनी मंत्री को सुझाव दिया गया होता, तो उन्होंने इसका मुद्रण करवा दिया होता।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अवश्य, मैंने इसका मुद्रण करवा दिया होता।