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माँ से विवाह करता है, क्या इसमें कोई बाध्यता है? क्या यह उपाय सक्रिय करने के लिए है? यह असहनीय है। हमारे लिए यह असंभव है कि हम इस स्थिति के साथ इसलिए समझौता कर लें क्योंकि यह रिवाज़ कुछ लोगों में स्वीकार्य है। मैं यह नहीं कहता कि उन लोगों की सुरक्षा न की जाए, परन्तु उनके लिए उपलब्ध बनाया जा सकता है।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः वास्तव में ऐसी ही व्यवस्था की गई है, यदि आप धारा (5) का अवलोकन करें यानी दोनों पक्षों को आपस में सपिंड नहीं होना चाहिए।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः क्या मैं विनम्र भाव से यह पूछ सकता हूँ कि किसी पुरुष का विवाह उसकी चाची की बेटी से हो सकता है? मैंने भी नियम देखे हैं। मैं आपके विचारार्थ निवेदन करना चाहता हूँ कि ऐसे मामलों में कानून में परिवर्तन किया जा चुका है और जब तक हमारी परिस्थितियों के अनुकूल कानून नहीं बनाया जाता, तब तक हमारे लिए यह कठिन है कि ऐसी कार्रवाई का समर्थन लिया जाए। वह हो सकता है जब प्रवर समिति के समक्ष संशोधन प्रस्तावित किए जाएँ, मैं नहीं चाहता कि यह विधेयक ठप कर दिया जाए या समाप्त कर दिया जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस सदन द्वारा एक संशोधन करके भी ऐसा किया जा सकता है।
एम. माननीय सदस्यः मुझे आशा है कि आप स्वीकार कर लेंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं कोई भी तर्कसंगत संशोधन स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं अति प्रसन्न हूँ और उस सीमा तक मैं इस विधेयक का समर्थन करने के लिए तैयार हूँ।
श्री तजामुल हुसेनः क्या माननीय सदस्य का इरादा है कि आज पूरा कर लिया जाए?
माननीय उपाध्यक्षः माननीय सदस्य किसी अन्य व्यक्ति की तुलना में इसमें रुचि रखते हैं, जो इस विधेयक द्वारा प्रभावित हैं। मैं वह देख रहा हूँ। मैं माननीय सदस्य से यह नहीं कह सकता कि वह कब समाप्त करने का प्रस्ताव करते हैं। यह बात उसी पर निर्भर है कि वह बिना पुनरावृति के संबंध में तर्कसंगत समय ले।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मेरा यह इरादा नहीं है कि मैं एक मिनट भी उससे अधिक लगाऊं जितनी कि आवश्यकता है। यदि मैं पुनरावृति करता हूँ तो मेरे विरुद्ध व्यवस्था का प्रश्न उठाया जाए। यदि हमारे समक्ष ऐसा विधेयक है जो तीस करोड़ लोगों के जीवन को प्रभावित करता है, तो यह अधिक नहीं है कि उस पर कुछ दिनों तक विचार किया जाए।