अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 471

456 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मेरे पास अब इसकी पाण्डुलिपि तैयार है। यदि माननीय कानून मंत्री इसका मुद्रण करवा दें तो मुझे प्रसन्नता होगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अब इसका कोई उपयोग नहीं हो पाएगा, क्योंकि उन्हीं बातों को आप सदन में कह चुके हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः अब हम मूल विधेयक की श्रेणी V पर आते हैं। यह आश्चर्यजनक दुर्घटना है-मैं किसी पर आक्षेप लगाने से डरता हूँ- पर इसमें शामिल प्रत्येक तथ्य को विभागीय विधेयक में हटा दिया गया है। इसमें उत्तराधिकारियों की नौ श्रेणियां और चार अन्य अनुपूरक श्रेणियां थी। मूल विधेयक श्रेणी V के तेरह उत्तराधिकारी अब पूरी तरह से हटा दिए गए हैं। क्या गलती सेख्...,?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः पूर्णतया जानबूझ कर!

श्री नजीरुद्दीन अहमदः तो फिर प्रवर समिति की रिपोर्ट में यह क्यों कहा गया है कि कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किए गए थे? यदि इन्हे जानबूझ कर हटाया गया था, तो मुद्दा केवल यह है कि क्या वे परिवर्तन महत्वपूर्ण थे। माननीय कानून मंत्री द्वारा सदन को यह आश्वासन दिया जा चुका है कि कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किए गए थे। कि ये परिवर्तन जानबूझ कर किए गए थे, यह स्वीकृत किया गया है इसलिए, अब प्रश्न यह उठता है कि ये परिवर्तन महत्वपूर्ण हैं या नहीं क्योंकि हमें आश्वस्त किया गया है कि कोई महतवपूर्ण परिवर्तन नहीं किए गए हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह तो अपनी-अपनी राय की बात है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः तो भी प्रश्न यही उठता है कि क्या ये महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं? कानून बनाने वाले के दृष्टिकोण से यह बहुत महत्वपूर्ण भले न हों परन्तु उत्तराधिकारी के लिए तो यह महत्वपूर्ण ही है। यदि आप उत्तराधिकारी के क्रम को थोड़ा-सा भी बदल देंगे, तो यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा। अभी तक हमें आश्वासन दिया गया था कि जो परिवर्तन किए गए थे, वे केवल प्रारूप की प्रकृति के थे। प्रवर समिति की यह रिपोर्ट है कि विभाग द्वारा कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किए गए। रिपोर्ट इतनी स्पष्ट और सुनिश्चित है और उसमें विभिन्न मुद्दों पर इतना स्पष्ट जोर दिया है कि वे कहते हैं कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किए गए हैं-केवल कुछ क्रमों में बदलाव या कुछ छोटे-मोटे शाब्दिक परिवर्तन किए गए है और यही कारण है कि विभागीय अथवा मूल विधेयक में परिवर्तनों की साइड-लाइनिंग अथवा अंडरलाइनिंग करते परितर्वनों को दर्शाने वाला उपयोगी तरीका नहीं अपनाया गया है।

अब इन सारे प्रश्नों के निचोड़ से यह प्रश्न निकलता हैः क्या ये महत्वपूर्ण परिवर्तन