अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 473

458 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(हस्तक्षेप)

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य अपनी बात जारी रखें।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः अब हम श्रेणी VI की मद (1) और (2) माता की माता और माता के पिता पर आते हैं। मूल विधेयक में मामा के पिता की तुलना में माता की माता को प्राथमिकता दी गई है, किंतु विभागीय विधेयक में इन्हें एक साथ रखा गया है। अब उन्हें एक साथ समान उत्तराधिकार प्राप्त होगा। श्रेणी IV की मद (3) में माता के भाई और माता की बहन को उत्तराधिकार में-मूल विधेयक में पूर्ववर्ती के बाद परवर्ती को रखा गया है, किंतु विभागीय विधेयक के अंतर्गत उन्हें एक साथ उत्तराधिकारी बनाया गया है। विभागीय विधेयक में मद (4) और (5) के तहत माता के भाई के पुत्र को पूरी तरह अलग रखा गया है। मद (7), (8) और (9) के तहत-माता की बहन के पुत्र, माता की भाई की पुत्री, माता की बहन की पुत्री को भी पूरी तरह से विलुप्त कर दिया गया है।

तत्पश्चात् श्रेणी VI में मद (3) को भी पूरी तरह से विलुप्त कर दिया गया है।

इसमें उत्तराधिकारियों की सूची को समाप्त कर दिया गया है, जिसमें कम से कम 20 क्रम परिवर्तन, संशोधन तथा विलोपन किए गए हैं। वारिसों को जानबूझ कर अथवा जान-बूझ कर पूरी तरह से हटा दिया गया है, किन्तु प्रवर समिति की रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत नहीं होता है। सदन में प्रवर समिति के माननीय सदस्यों ने बार-बार मुझसे पूछा है कि अन्तर कहाँ-कहाँ हैं, यह मैं उन्हें बताऊँ। मैं उन पर ध्यान न दिए जाने के लिए किसी भी माननीय सदस्य को दोष नहीं दूंगा। परिवर्तनों का स्थान बदलने अथवा उन्हें मूल स्थान से हटाए जाने से ये परिवर्तन सुस्पष्ट नहीं रहें होंगे। उधर प्रवर समिति की रिपोर्ट में यह गारंटी दी गई है कि कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किया गया है। ये विभागीय विधेयक के माध्यम से परिवर्तन किए गए थे जो प्रवर समिति के ध्यान से निकल गए हों। कम से कम उनका ध्यान विभागीय बिल की तरफ नहीं दिलाया गया था। एक बहुत ही आदरणीय और सक्षम सदस्य डॉ. बक्शी टेक चन्द ने अपने असहमति पत्र में कहा है कि प्रवर समिति ने विभागीय विधेयक पर ध्यान केंद्रित कर दिया था, क्योंकि वे आश्वस्त थे कि कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किए गए थे। मैं डॉ.बक्शी टेक चन्द से पूछना चाहूँगा कि क्या इन तथ्यों की ओर विभाग ने उनका ध्यान दिलाया था अथवा डॉ. अम्बेडकर ने वैसा किया था? इतने ज्यादा विलोपन और स्थानों के परिवर्तन पर किसी भी सदस्य का ध्यान अब तक नहीं जा सकेगा, जब तक कि वह एक मेहनती वकील की तरह दोनों की तुलना के लिए अथक परिश्रम नहीं करेगा।

डॉ. बक्शी टेक चंद (पूर्वी पंजाबः सामान्य)ः मैं अपने माननीय मित्र का ध्यान रिपोर्ट के पृष्ठ 9 की ओर दिलाना चाहूँगा, जहाँ मेरी असहमति की टिप्पणी छपी है। वहाँ मैंने कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तनों का जिक्र किया है। जिन परिवर्तनों को मैं महत्वपूर्ण