अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 474

459

समझता हूँ, उन्हें किसी भी कीमत पर, और क्योंकि यह सुझाव मैंने ही दिया था, विधेयक को पुनः परिचालित किया जाना चाहिए ताकि जनता की राय प्राप्त की जा सके अथवा किसी भी स्थिति में उसे प्रवर समिति को सौंपा जाए। पृष्ठ 9 पर उन बड़े तथ्यों जिन विधेयक में जो परिवर्तन किए गए थे, का उल्लेख किया गया है, भले ही वे उतने विस्तृत नहीं हों, जैसा कि माननीय सदस्य आज अपने भाषण में व्यक्त कर रहे हैं। यह कहना सही न होगा कि प्रवर समिति के किसी भी सदस्य को उनकी जानकारी नहीं थी। निःसंदेह किसी के पास माननीय सदस्य जितना परिश्रम अथवा धैर्य नहीं है, परन्तु विषय उनके ध्यान के जा सका था। चूंकि उन्होंने मेरा नाम लिया है, मेरा कर्तव्य है कि मैं यह तथ्य सदन के समक्ष रखूं। अपनी असहमति की टिप्पणी में मैंने उत्तराधिकार के क्रम में किए गए उन परिवर्तनों का उल्लेख किया है, जिन्हें मैं महत्वपूर्ण समझता हूँ और जिनके संबंध में मैं अपने माननीय मित्र के साथ पूरी तरह सहमत हूँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः इस स्पष्टीकरण के लिए मैं बहुत आभारी हूँ। न्यायिक प्रक्रिया का सार्वधिक अनुभव रखने वाले एक सम्मानीय सदस्य यह सोचते हैं कि ये महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं और उन्होंने सोचा कि वे इतने महत्वपूर्ण थे कि विधेयक को पुनः परिचालित किया जाना चाहिए। यही बात मैं कह रहा था कि प्रवर समिति के कम से कम एक सदस्य तो यह सोचते हैं कि वे परिवर्तन महत्वपूर्ण थे। उन्होंने उन परिवर्तनों को देखा था, किन्तु क्या इस ओर उनका ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया गया?

पंडित ठाकुर दास भार्गव (पूर्वी पंजाबः सामान्य)ः श्री बालकृष्ण शर्मा ने भी उस पर हस्ताक्षर किए हैं।

एक माननीय सदस्यः लेकिन उन्हें कोई न्यायिक अनुभव नहीं था।

पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः उन्हें सामाजिक अनुभव तो था।

माननीय अध्यक्षः पंडित बालकृष्ण शर्मा की भी यही राय है। हालांकि डॉ. टेक चन्द का नाम लेना काफी होगा। कोई और नाम जोड़े जाने से उनके प्राधिकार और स्थिति में कोई गंभीर वृद्धि नहीं होगी। इन माननीय सदस्यों ने सोचा कि ये महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं और इसलिए उन्होंने सोचा कि विधेयक को पुनः परिचालित किया जाना आवश्यक है। विधेयक को अन्य भागों में भी परिवर्तन हैं, जिन्हें खोज पाना बहुत कठिन कार्य होगा।

विभागीय समिति द्वारा किए गए इन परिवर्तनों के आलोक में और डॉ. टेक चन्द की भारी भरकम टिप्पणियों के बाद, ये बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन थे, मैं सोचता हूँ कि इस मामले में अब कोई शक जाहिर नहीं किया जाना चाहिए कि इन परिवर्तनों पर पुनर्विचार करने अथवा इसे पुनः परिचालित करने के लिए विधेयक को प्रवर समिति के पास पुनः भेजा जाना चाहिए।