अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 475

460 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

एक माननीय सदस्यः उसी प्रवर समिति को?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः उसी प्रवर समिति को लेकर मुझे कोई आपत्ति नहीं है। इसमें बहुत अच्छे और सच्चे व्यक्ति हैं, न्याययिक प्रक्रिया और कानून की समझ रखने वाले व्यक्ति हैं और जो कानून की विभिन्न धाराओं पर व्यावहारिक प्राधिकार रखने वाले लोग हैं। वास्तव में, प्रवर समिति में हर प्रकार की योग्यता का प्रतिनिधित्व है। प्रवर समिति पर मुझे पूर्ण विश्वास है और इस पर मेरा विश्वास खत्म नहीं हुआ है। मेरा कथन यह है कि इन मामलों की सावधानीपूर्वक छानबीन की जानी चाहिए और प्रत्येक परिवर्तन पर सावधानीपूर्वक चिंतन करना चाहिए और उन्हें सोच-समझकर स्वीकार करना चाहिए। महत्वपूर्ण परिवर्तन चुपचाप और सोच-समझकर किए गए। हमें कानूनी मंत्री द्वारा और प्रवर समिति द्वारा आश्वस्त किया गया है कि कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किए गए हैं। एक ओर तो हमें सदन में सर्वश्रेष्ठ विधिक योग्यता प्राप्त व्यक्तियों की राय प्राप्त है कि ये महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं तथा दूसरी ओर, एक प्रकाण्ड कानूनी विद्वान कहते हैं कि उन्होंने बहुत सोच-विचार ये परिवर्तन किए और, वहीं उसी समय यह भी कते हैं, कि उन्होंने कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किए हैं। यह गारंटी डॉ. अम्बेडकर ने अपने हस्ताक्षर के साथ स्वयं दी है। इस प्रकार प्रवर समिति हताश होकर आपस में ही बंट गई है। यदि दो ऐसे प्रसिद्ध प्राधिकारी एक व्यापक मुद्दे पर इस प्रकार भिन्न-भिन्न बातें करते हैं तो मैं सोचता हूँ कि इस मामले पर समिति के पुनर्विचार की आवश्यकता है और वही बात मैंने कहीं है। यद्यपि कानून मंत्री सोचते हैं कि ये महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं थे, तो शायद एक विवेकशून्य सदन ही उनसे सहमत होगा। किसी का वारिस होना एक व्यक्ति का एक महत्वपूर्ण अधिकार है। यह कहना कि किए गए परिवर्तन, महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं है, कुछ इस प्रकार कहना होगा, जो स्पष्टतया और वस्तुतः गलत होगा। अतः मैं कहता हूँ कि परिवर्तन महत्वपूर्ण होने के कारण और यह गारंटी दिए जाने के कारण कि कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किए गए हैं, केवल इसी आधार पर विधेयक को प्रवर समिति के पास वापस भेजा जाना चाहिए या सकारात्मक दिशानिर्देशों के साथ इस प्रकार परिचालित किया जाना चाहिए कि सबका ध्यान इन परिवर्तनों की ओर आकर्षित हो सके और वे सावधानीपूर्वक, बुद्धिमानी से, तथा इच्छापूर्वक उन्हें स्वीकार अथवा अस्वीकार कर सकें। इसी तरह के कुछ अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन भी हैं।

श्री बी.एन. मुन्नावल्ली (बम्बई राज्य)ः वह केवल एक ही तर्क बार-बार दोहरा रहे हैं।

माननीय अध्यक्षः मैंने सोचा कि उन्होंने अपनी बात समाप्त कर दी है। यदि उनके पास कोई अन्य विषय न हो, तो वह बैठ सकते हैं।