462 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह इतना आसान नहीं है। श्रीमान्, मेरी आवाज दबाने के साथ ही मुझे धमकाया जा रहा है। मैंने अभी तक नहीं देखा है कि यहां किसी सदस्य ने मेरी आवाज को दबाया होµमुझे अभी तक ऐसा कोई दिखाई नहीं दिया है। मैं सादर आमंत्रित करता हूँ कि कोई भी आए और मुझ पर चीखकर मेरी आवाज को दबा दे। वह स्वयं देख रहा होगा कि सदन में इतनी चीख-चिल्लाहट के बीच भी मुझे अपनी आवाज सुनाने के लिए किसी माइक्रोफोन तक की आवश्यकता नहीं है।
माननीय अध्यक्षः मेरा अनुरोध है कि सदन के भीतर इस चुनौती को स्वीकार करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः सदन के बाहर भी मुझे चुनौती देना, उनके लिए निरापद नहीं होगा।
श्री तजामुल हुसैनः आप नहीं चाहते कि हम बीच में बोलें, इसलिए मैं एक जानकारी पाने के लिए आपकी अनुमति चाहता हूँ। मैं अपने माननीय मित्र से यह जानना चाहता हूँ कि आज पहली अप्रैल है, क्या इसी कारण से वह इस विधेयक पर पूरे दिन के लिए चर्चा करते रहना चाहते हैं?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः ‘आल फूल्ड डे’ (मूर्खत दिवस) पर यह प्रस्ताव लाने से संबंधित यह प्रश्न माननीय कानून मंत्री को संबोधित होना चाहिए!
माननीय अध्यक्षः यह बात हरेक पर लागू होती है या नहीं? पर माननीय सदस्य अपना भाषण जारी रहने दें।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः तथा हम मूल विधेयक के भाग II, की अगली धारा पर आते हैं।
डॉ. मॉन मोहन दास (पं. बंगालः सामान्य)ः श्रीमान् प्रतीत होता है कि माननीय सदस्य तैयार होकर नहीं आए हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं माननीय डॉ. साहब ही बात समझ नहीं पाया।
माननीय अध्यक्षः आप अपनी बात जारी रखें। मुझे उम्मीद है कि वह कम से कम आज अपना भाषण समाप्त कर लेंगे।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं नहीं जानता।
माननीय अध्यक्षः मैं केवल इतना कहूंगा कि महत्वपूर्ण परिवर्तनों के इस मुद्दे पर अभी तक काफी कुछ कहा जा चुका है। आखिरकार माननीय मंत्री जी इस विधेयक के प्रभारी नहीं है इसलिए केवल उन्हीं को संतुष्ट करने की आवश्यकता नहीं है। उनके अपने विचार हैं।