अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 478

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसका निर्णय सदन करेगा।

माननीय अध्यक्षः हाँ, अंततः सदन ही इसका निर्णय करेगा। अतः माननीय सदस्य को एक सदस्य पर, चाहे वह कितना ही महत्वपूर्ण हो, अधिक समय व्यतीत करने की आवश्यकता नहीं है। वह सदन को अपने साथ ले जाने की कोशिश करें। जैसा मैंने पहले भी कहा महत्वपूर्ण परिवर्तनों के मामले में काफी कुछ कहा जा चुका है। मैंने सोचा कि वह विवाह, तलाक और गोद लेने जैसे अन्य मूल मुद्दों का हवाला देने जा रहे हैं। मैं नहीं समझता कि माननीय मंत्री महोदय हठधर्मी होंगे और मैं आश्वस्त हूँ कि यद्यपि इस बारे में उनके विचार बहुत अच्छे होंगे, वे प्रतीक्षा करना चाहेंगे और देखेंगे कि दूसरे पक्ष से कितनी देर तक तर्क रखे जाते हैं और वे संतुष्ट हो सकते हैं। मैं सोचता हूँ कि माननीय सदस्य अब मूल मुद्दों पर आएंगे। इस मुद्दे पर पहले ही काफी समय व्यतीत हो चुका है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मुझे इतने धैर्य से सुनने के लिए मैं खुले दिन से कानून मंत्री के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करना चाहता हूँ। मैं कहता हूँ कि मेरे पास परिवर्तनों को दर्शाने वाले अन्य तथ्य भी हैं, जिनका मैं संक्षिप्त विवरण दूंगा।

माननीय अध्यक्षः परिवर्तनों की बात छोड़ दें। परिवर्तन हुए हैं। मैं इसे इस तरह कह सकता हूँ कि मैं किसी गोपनीय बात को छिपा नहीं रहा हूँ और जैसा मेरा विचार है सदन के समक्ष कुछ भी गोपनीय नहीं होता। प्रवर समिति में प्रस्तुत होने के बाद, जब कोई मामला सदन के समक्ष आता है और अगर प्रवर समिति कोई गलती करती है, तो सदस्य कह सकते हैं कि यह गलती है तथा गलती को ठीक किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए एक या दो मामलों के अलावा, प्रवर समिति में प्रत्येक सदस्य ने क्या कहा उसे सदन के समक्ष नहीं रखा जाना चाहिए, क्यों ये बातें द्रव्य रूप में होती हैं और इससे विघ्न और विद्वेष उत्पन्न हो सकता है। मैं ऐसा कह सकता हूँ। जहाँ तक प्रवर समिति का प्रश्न है, वहाँ किसी भी प्रारूप पर विचार किया जा सकता है। वहाँ प्रस्तुत प्रारूप मंत्रालय का था। उस समिति की रिपोर्ट के पैरा 2 के प्रारंभ में यह कहा गया है किः

फ्विधान परिषद में प्रस्तुत हिंदू संहिता के प्रारूप की शुरूआत से पहले विभागीय स्तर पर कोई छानबीन नहीं की गई थी, और विधि मंत्रालय ने (जिसमें शीर्ष पद पर कानून मंत्री भी शामिल हैं), जिसके पास विधान परिषद के पिछले सत्र के अंत तथा वर्तमान सत्र के आरंभ के बीच की अवधि में विधेयक की जांच-पड़ताल का अवसर भी था, अब एक संशोधित प्रारूप तैयार किया है...य्

प्रारूप को प्रवर समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था और अध्यक्ष की व्यवस्था