अनुभाग दो - प्रवर समिति द्वारा संशोधित तत्कालीन हिंदू संहिता सहित डॉ. अम्बेडकर द्वारा तैयार हिंदू संहिता विधेयक का प्रारूप - Page 479

464 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यह है कि प्रारूप के साथ जो मूल विधेयक प्रवर समिति को भेजा गया था, जिसे हम समस्त संशोधनों की पूरी सूची मान लेंगे और जिसे कानून मंत्री प्रस्तुत करना चाहते थे, उस पर प्रवर समिति द्वार विचार किया गया था। सदस्यों को यह कहने का हक है कि विधेयक और उसमें शामिल धाराएँ गलत हैं, कि उन्होंने समाज में गड़बड़ी पैदा की है और यह कि प्रवर समिति द्वारा मूल विधेयक में किए गए परिवर्तनों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। मैं समझता हूँ कि इससे सदन को इस निष्कर्ष पर पहुंचने में मदद मिलेगी कि या तो संपूर्ण विधेयक अथवा उसकी विभिन्न धाराएं महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इस मामले पर हम पहले भी काफी समय व्यतीत कर चुके हैं। पर इस मामले का स्पष्टीकरण आवश्यक है और मैं नहीं समझता कि यहां उपस्थित कोई भी सदस्य किसी विशेष मुद्दे पर हठधर्मिता दिखाना चाहता है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं खुले तौर पर यह कह सकता हूँ कि मेरा दिमाग खाली बक्सा नहीं है बल्कि मैं खुले दिमाग का व्यक्ति हूँ।

माननीय अध्यक्षः हम भी यही आशा करते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं उनका बहुत आभारी हूँ। श्रीमान्, मैं विधेयक के अन्य खंड पर आता हूँ। मैं सदन का ध्यान विभागीय विधेयक की धारा 102 की ओर आकर्षित करना चाहूंगा, जो मूल विधयेक की धारा 101 के तदनुरुप है। विभागीय विधेयक द्वारा इसकी पहली बार प्रस्तुति की गई है। प्रवर समिति ने कुछ परिवर्तन किए, किन्तु विभागीय समिति द्वारा इसमें एक गंभीर परिवर्तन किया गया। विभागीय विधेयक में यह व्यवस्था है कि यदि एक पुरुष और एक महिला की ही बराबरी पर खड़े हों, तो महिला की तुलना में पुरुष को दुगुना हिस्सा प्राप्त होगा। पर अंतिम विधेयक में दोनों को एक समान हिस्सा दिया गया है। जहां तक अंतिम विधेयक के न्याय का प्रश्न है, इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता, किंतु मैं कहना चाहता हूँ कि यह नई शुरुआत एक विचलन है।

माननीय अध्यक्षः यदि, यह मान लें कि, 100 विचलन हैं तो क्या सभी 100 विचलनों को समाप्त किया जाना आवश्यक है? केवल कोई दस अथवा पन्द्रह से भी अधिक हैं, सांकेतिक तौर पर काफी होंगे। वह कुछ विचलनों को ले सकते हैं और यह कह सकते हैं कि इन कारणों से मामले को वापस प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए अथवा संपूर्ण मामला जनता की राय लेने के लिए भेजा जाना चाहिए। मैं सोचता हूँ कि माननीय सदस्य ने यह निष्कर्ष निकाला है कि जहां कहीं कोई विचलन है, विभिन्न मुद्दों के उस भाग का वे उल्लेख कर रहे हैं विचलन हैं और जो सूची परिचालित की गई है, उसमें विचलनों की एक सूची भी शामिल है, जिसका विस्तार तेरह पृष्ठों तक है, यद्यपि इसमें यह संदर्भ नहीं दिया गया है कि विचलन क्यों किए गए हैं।