488 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विवाह किसी न किसी कारण से अवैध बताया। परन्तु उन दिनों सरकार ने हिंदुओं को प्रगतिशील नहीं बनने दिया और 700 या 800 वर्ष पूर्व की पुस्तकों में दिये गये रिवाजों को ही प्रचलन में रखने पर बल दिया। मुझे एक मामला याद है। महोदय, मैं समझता हूँ कि यह 40 वर्ष पहले की बात है। बम्बई उच्च न्यायालय में एक ऐसी विधवा के विवाह की वैधता का मामला लाया गया था जिसके पति के कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी थी और पोते-पोतियों की दादी बन चुकी थी। बम्बई उच्च न्यायालय ने उसके विवाह को अवैध बताया, क्यों वह अपने पति की तुलना में ऊंची जाति की थी। एक और ऐसा ही मामला था, जो चार वर्ष तक चला और जिसमें एक उच्च जाति के पुरुष का एक निम्न जाति की महिला के साथ विवाह को अवैध बताया गया था। तथ्य यह था कि श्री लालूभाई शॉ एक उदार जज थे, शायद मैं मुकदमा जीत जाता परन्तु कुछ प्रान्तों में ‘अनुलोम’ विवाहµजिसमें पति उच्च हिंदू जाति का और पत्नी निम्न हिंदू जाति की होµविधिमान्य नहीं है। देश के कुछ भागों में हिंदुओं और जैनियों के बारे में भी यह प्रश्न उठा है। हिंदुओं और जैनियों में विवाह होते हरे हैं, परन्त वकीलों के पास उनकी राय जानने के लिए यह मुद्दा आता रहा है कि क्या एक हिंदू और एक जैन के बीच विवाह वैध है। ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका वर्षों पहले समाधान होना चाहिए था। परन्तु अब हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं कि इनका समाधान तुरन्त होना चाहिए।
मेरे माननीय मित्र, पंडित ठाकुर दास भार्गव ने पंजाब के मामले का हवाला दिया है। यह किसी प्रान्त विशेष का मामला नहीं है, इससे पूरा देश प्रभावित है। शिक्षा के कारण, आजादी के कारण भिन्न-भिन्न जातियों के बीच विवाह हो रहा है। परन्तु इस हिंदू कानून के सिद्धान्त के कारण उन्हें बड़ी कठिनाइयां झेलनी पड़ती हैं। दर्जनों ऐसे मामले हैं जिनमें पक्षकार केवल सिविल विवाह अधिनियम के अन्तर्गत विवाह स्वीकार करते हैं, वे ऐसा करना नहीं चाहते_ वे इससे नफरत करते हैं, वे अपने संयुक्त परिवार को तोड़ना नहीं चाहते_ वे नहीं चाहते कि उन पर उत्तराधिकार अधिनियम लागू हो, वे अपने माता-पिता से अलग नहीं होना चाहते, परन्तु कानून की इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के कारण उन्हें सिविल विवाह अधिनियम के अन्तर्गत विवाह करना पड़ता है। अतः मेरा कहना है कि यह बहुत दुखदायी है और इसका तुरन्त समाधान किया जाना चाहिए। मुझे प्रसन्नता है कि प्रस्तावक ने 28 फरवरी के बारे में आपका सुझाव स्वीकार कर लिया है। यह विधेयक यथासंभव पारित होना चाहिए।
मैं एक छोटी सी बात और कहना चाहूंगा और मुझे विश्वास है कि यह कभी भी प्रवर समिति में दूर कर ली जाएगी। जो मैं कहना चाहता हूँ, वह इस प्रकार हैःµ
फ्हिंदुओं के बीच कोई भी विवाह, चाहे वे किसी धर्म, जाति या उपजाति के हों, अवैध नहीं है या अवैध नहीं माना जाएगा, चाहे हिंदू नियम व्याख्या या कोई रीति-रिवाज इसके विपरीत हो।य्