अनुभाग तीन - प्रवर समिति से वापस भेजे जाने के पश्चात् हिंदू संहिता पर की गई चर्चा (11 फरवरी, 1949 से 14 दिसम्बर, 1950 तक) - Page 505

490 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. बक्शी टेकचन्द (पूर्वी पंजाबः जनरल)ः मैं पंडित ठाकुर दास भार्गव के इस प्रस्ताव का हार्दिक स्वागत करता हूँ कि इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजा जाए। इस विधेयक को सदन के बहुत से भागों का समर्थन मिला है और कोई इसका विरोध नहीं करेगा।

मैं कहना चाहूँगा कि यह विधेयक एक नया उपाय है। इसी प्रकार का एक विधेयक श्री विट्टलभाई पटेल द्वारा 1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिय काउंसिल में प्रस्तुत किया गया था। उस विधेयक पर राय जानने के लिए वितरित किया गया था। निःसंदेह भिन्न-भिन्न प्रकार के मत प्रकट किए गए। रूढि़वादियों ने अधिकृत लोगों, कर्मचारियों ने उसका विरोध किया, परन्तु अनेक लोगों और सोसाइटियों ने इसका समर्थन किया। परन्तु विचार के लिए काउंसिल में प्रस्तुत किए जाने से पहले मोंटगू चेम्सफोर्ड रिफार्मस् लागू हो गए और काउंसिल भंग कर दी गई तथा यह विधेयक रद्द हो गया। इसके पश्चात् डॉ. गौड़ ने 1923 में 1872 के पुराने विधेयक में संशोधन करने का प्रयास किया था, परन्तु तब भी इसका विरोध हुआ था और कुछ विशेष संशोधन ही किए गए। इसमें केवल यह किया गया था कि अलग-अलग जातियों और उपजातियों के हिंदू विवाह कर सकते थे परन्तु सांस्कारिक विवाह की अनुमति नहीं थी। जहां तक सांस्कारिक विवाह का संबंध है हिंदू कानून के अन्तर्गत भिन्न-भिनन प्रांतों में भिन्न-भिन्न स्थिति है। जैसे कि चिह्नित किया गया है, कुछ प्रान्त अनुलोम विवाह की अनुमति देते हैं, कुछ नहीं देते। जिन प्रान्तों में अनुलोम विवाह की अनुमति नहीं है, उनके बारे में न्यायालयों ने निर्णय लिया कि यद्यपि कुछ स्मृतियों में अनुलोम विवाह की अनुमति है, परन्तु यह प्रथा प्रचलन में नहीं है और उनको अब मान्यता नहीं है। लगभग सभी प्रान्तों में प्रतिलोम विवाह अवैध हैं। पंजाब में और कुछ अन्य प्रान्तों में रीति-रिवाज ही नियम हैं और कुछ अन्य प्रान्तों में रीति-रिवाज ही नियम हैं और कुछ जातियों में विवाह की अनुमति है परन्तु कुछ अन्य जातियों में इसकी अनुमति नहीं है। मैं यह समझता हूँ कि अब समय आ गया है और हमें कड़े कदम उठाते हुए इस उपाय को कानूनी रूप प्रदान किया जाना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि हिंदू संहिता जो हमारे सामने प्रस्तुत है, में ऐसे नियम हैं जो उसे कार्यान्वित/प्रभावी बना सकेंगे। हिंदू कोड बिल एक व्यापक मानक है जो विविध विषयों को समाहित किए है और व्यापक क्षेत्र को समेटे हुए है। इसके भी कुछ भाग का विरोध किया जा रहा है। पता नहीं इस विधेयक को पारित होने में कितना समय लगेगा और यह किस रूप में पारित होगा या यह पारित भी होगा। ( श्री एल. कृष्णस्वामी भारतीः यह पारित होगा।) निश्चित तौर पर इसमें समय लगेगा। जिस तरह का मुद्दा है उसे शीघ्रता से पारित न करने का कोई कारण भी नहीं है। इससे अधिकतर लोग सहमत हैं। अतः मैं इस प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ।

श्री महावीर त्यागी (उत्तर प्रदेशः सामान्य)ः मैं भी इस विधेयक का समर्थन करता हूँ। जैसा कि मेरे मित्र माननीय मुंशी जी ने कहा है, यह एक व्यापक सुधार है।