अनुभाग तीन - प्रवर समिति से वापस भेजे जाने के पश्चात् हिंदू संहिता पर की गई चर्चा (11 फरवरी, 1949 से 14 दिसम्बर, 1950 तक) - Page 507

492 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है। वास्तव में यही सिद्धान्त हिंदू संहिता में दिए गए हैं। अतः मेरे माननीय मित्रों को मेरा सुझाव है कि वे या तो इसे वापस ले लें या इस विधेयक पर विचार करना मुल्तवी कर दें ताकि हमें सही रूप से पता लग जाए कि हिंदू संहिता का क्या होगा? इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मैं हिंदू संहिता प्रस्तुत कर रहा हूँ और सदन के सामने एक विधेयक विचार के लिए है, जैसा कि प्रवर समिति ने रिपोर्ट की है, तो मैं इस सुझाव के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर सकता।

चौ. रनबीर सिंहः खड़े हुए।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रासः सामान्य)ः उन्हें बोलने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।

आगे न बोलने का प्रस्ताव पेश कर दिया गया है।

माननीय उपाध्यक्षः मैंने डॉ. अम्बेडकर को बोलने की अनुमति दी है। और वे प्रायोजक नहीं हैं। प्रश्न नहीं पूछा गया।

चौ. रनबीर सिंह (पूर्वी पंजाबः सामान्य)ः (हिंदी भाषण का अंग्रेजी अनुवाद) उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूँ क्योंकि मैं एक हिंदू हूँ और प्रारंभ से ही इस विधेयक में दिए गए सिद्धांतों में विश्वास करता हूँ। यदि हिंदुओं में कोई ऐसा समुदाय है, जिसने अपने समुदाय से बाहर संबंध स्थापित किये हैं और कोई झगड़ा नहीं हुआ है, जो वह जाट समुदाय है। यह सच है कि कुछ असहमतिओं के तत्व थे और सामाजिक दबाव भी था, परन्तु वे नगण्य हैं। वास्तव में इस विधेयक से देश में वे सिद्धांत स्थापित होंगे जिनमें हम सदियों से विश्वास करते आये हैं। इसलिए मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूँ।

दूसरे, जैसा कि मेरे माननीय मित्र श्री त्यागी ने कहा है, इससे आपसी विवाद समाप्त हो जाएंगे, जिनके कारण हम गुलाम बने। छोटी रियासतों का एकीकरण करके सरदार पटेल ने देश को संगठित बनाया है और जिससे इस समस्या का समाधान हो गया है। यह विधेयक हमारी सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए बहुत अच्छा है।

जहां तक हिंदू संहिता विधेयक का संबंध है, वह एक बहुत बड़ी चीज है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह देश या यह सदन इसे स्वीकार करेंगे। इसमें कुछ ऐसे उपबंध है, जिन पर हमारे नेताओं में मतभेद हैं। अतः यही समझ में नही आता कि यह कहाँ तक सही है कि इस विधेयक को स्थगित कर दिया जाए या इसे अस्वीकृत कर दिया जाए क्योंकि यह हिंदू संहिता विधेयक का एक भाग है और हिंदू संहिता पारित होने पर यह भी उसमें पारित हो जाएगा यदि वह पारित नहीं हुआ, यह विधेयक के पारित होने की संभावना हो सकती है। इन शब्दों के साथ मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूँ।