अनुभाग तीन - प्रवर समिति से वापस भेजे जाने के पश्चात् हिंदू संहिता पर की गई चर्चा (11 फरवरी, 1949 से 14 दिसम्बर, 1950 तक) - Page 508

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श्री के.एम. मुंशीः मुझे डॉ. अम्बेडकर द्वारा उठाए गए एक मुद्दे का उत्तर देने की अनुमति देने की कृपा करें।

एक माननीय सदस्यः पंडित भार्गव उसका उत्तर दे सकते हैं?

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मुझे प्रसन्नता है कि सदन के सभी पक्षों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। यह ऐसा उपाय है, जिस पर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए और मुझे प्रसन्नता है कि इसे सबने पंसद किया है। एक आपत्ति उठाई गई है कि जब तक हिंदू संहिता पर चर्चा चल रही है, तब तक इस विधेयक पर आगे नहीं बढ़ा जाए। यदि इस विधेयक में दिये गये सिद्धांत और हिंदू कोड में दिए गए सिद्धांत एक-दूसरे के विपरीत हैं, तो यह आपत्ति उठाना ठीक है, परन्तु जब दोनों के सिद्धांत एक जैसे हैं तो यदि इस विधेयक को पहले पारित कर दिया जाता है, हिंदू संहिता को पारित करने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। यह बात समझ में नहीं आती कि इस विधेयक को पारित करने से हिंदू संहिता को पारित करने में कैसे दिक्कत आ जाएगी, बल्कि इससे तो उसे पारित करने की गति और तेज हो जाएगी। मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या कोई ऐसा कानून या परम्परा या नियम है जिसमें यह दिया गया हो कि जब हिंदू संहिता जैसे विस्तृत विधेयक पर चर्चा जारी हो, तो दूसरा विधेयक पारित नहीं हो सकता। ऐसी कोई परम्परा नहीं है। यह बात मेरी समझ में नहीं आती कि जब एक उपाय में एक दूसरे उपाय के मुद्दे शामिल हैं, तो दूसरे उपाय को पारित नहीं किया जा सकता।

बक्शी टेकचन्द ने बताया है कि यह उपाय 1919 के विधेयक की विषय-वस्तु था और यह विधेयक हमारे माननीय प्रेसीडेंट वी.जे. पटेल के नाम से था। जहां तक हिंदू संहिता का संबंध है, यह उपाय बहुत पहले उठाया गया था। इस प्रकार के उपाय में यदि तकनीकी खामियां हैं भी, तो ये नहीं उठाई जानी चाहिए। यदि हिंदू संहिता पारित नहीं हुई, तो उन हजारों पुरुषों और महिलाओं का क्या होगा, और इस सदन में इस पर खंडवार चर्चा नहीं हो रही है और यह सितम्बर या अक्तूबर में होगी और इस सत्र में यह पारित नहीं होगा, क्योंकि यह एक विवादास्पद विधेयक है और एक वर्ष भी लग सकता है और हजारों युवा पुरुषों और महिलाओं का क्या होगा जो इस विधेयक के उपबंधों के अन्तर्गत विवाह करने के इच्छुक हैं और देश को मजबूत बनाने के प्रयासों का क्या होगा?

महोदय, यह एक मजाक का मामला नहीं है। मैं तो डॉ. अम्बेडकर की मदद कर रहा हूँ क्योंकि उनका विवाह भी इसी विधेयक के द्वारा ही वैध होगा। वे इस पर क्यों हंस रहे हैं? यह उन पर लागू हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। यदि खामियां होंगी तो दूर कर ली जाएंगी। मैं जानता हूँ कि सैकड़ों लोग इस विधेयक के उपबंधों के अन्तर्गत विवाह करना चाहते हैं और क्या इस नियम के अंतर्गत विवाह करना गलत है? कोई भी इस विधेयक की निंदा कर सकता है, इस सत्र में इसके पारित होने में