हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 51

36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सब कुछ करते हैं। हमारे गाँवों में यदि बेटी अपने माता-पिता के घर आती है, तो प्यार के बहाने उसे हमेशा कुछ न कुछ दिया जाता है।

श्रीमती रेणुका रेः इस देश में बेटियों को जन्म ही नहीं लेना चाहिए।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः इस बारे में मैं जानता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर क्या कहेंगे। वह कहेंगे, कि पुत्रों की अपेक्षा पुत्रियों का जन्म होना चाहिए। क्या हम यह नहीं जानते कि अनेक राजपूतों के परिवारों में बेटियों को मार दिया जाता है। मैं नहीं चाहता कि ऐसा किया जाए। यह निश्चित ही सही नहीं है। जो मैं निवेदन कर रहा हूँ कि सैकड़ों वर्षों तक हम ऐसे समाज में रहे हैं। हमने बेटे को परिवार की धुरी समझा है। बेटे के बिना परिवार में बेटी को गिना नहीं जाता। वह पुत्र ही है, जो पिता को नरक से बचाता है। (पतात त्रायते) यदि हम मुसलमानों के सामन होते तो हम निश्चित रूप से इसे स्वीकार कर लेते, परन्तु यह बहुत कठिन है। रेणुका रे का वह व्यवधान मेरे तर्क को कुछ राहत देता है कि जहां तक लोगों की संकल्पनाओं का संबंध है और उनके मानसिक विचारों का संबंध है, इस प्रकार का अभिनव प्रयत्न अन्य कुछ न लाकर विपदा ही लाएगा। अतः मेरा नम्र निवेदन है और इस मामले में श्रीमती रेणुका रे भी मेरा समर्थन कर रही हैं।

श्री कृष्णास्वामी भारतीः मैं नहीं जानता कि यह देश के किस भाग से आए हैं, परन्तु ऐसा लगता है कि उन्हें यह ज्ञात नही है कि पंजाब में क्या रिवाज़ है। किसी अन्य प्रान्त में कह सकता हूँ कि स्थितियाँ एक जैसी नहीं हैं। ये स्थितियाँ क्यों हैं? ये इस तथ्य के कारण हैं कि हजारों वर्षों से हमारे परिवारों के संबंध में हमारी नीति और हमारे सिद्धान्त तथा हमारे विचार परिवार के संबंध में ठीक नहीं रहे हैं जैसे कि पंजाब में रहे हैं। दामाद सभी बुरे नहीं होते। पुत्र भी सभी बुरे नहीं होते।

श्री महावीर त्यागी (उ.प्र.ः सामान्य)ः यह साले साहब हैं जो करते हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः एक कहावत है जो इस प्रकार हैः

(उर्दू की कहावत का अनुवाद)

(1) घर का निर्माण करने का अर्थ है, गांव का कूड़ा-करकट जमा करना (झगड़ों के लिए निम्न कारण पर्याप्त हैं।) (2) गांव के पास खेत_ आम है_ और (3) गांव में दामाद का निवास-स्थान। दूसरी कहावत हैः

(उर्दू की कहावत का अनुवाद)

यम, दामाद, भांजा, चौकीदार और सुनार कभी भी अपने नहीं हो सकते। आप चाहें तो इनके साथ निभा कर देख सकते हैं।

यह सच्चाई है। मुझे कहना यह है कि आप किसी भी व्यक्ति को पंजाब जाने के लिए कह कर इसे सिखों तथा जाटों के बीच देखने को कह सकते हैं।