अनुभाग तीन - प्रवर समिति से वापस भेजे जाने के पश्चात् हिंदू संहिता पर की गई चर्चा (11 फरवरी, 1949 से 14 दिसम्बर, 1950 तक) - Page 511

496 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शामिल हैं और मैं इन सभी बातों का स्वयं अध्ययन करूंगा, जो अभी तक मैंने नहीं किया है। मैं मामले को अभी ऐसे ही छोड़ता हूँ।य्

अतः मैंने इसे अपने अध्ययन के लिए छोड़ दिया था। अब मैंने इसका अध्ययन कर लिया है। माननीय सदस्यों ने व्यवस्था के प्रश्न के बारे में जो कुछ कहा, मैंने प्रवर समिति की रिपोर्ट, पहले विधेयक और प्रवर समिति के समक्ष आए अन्य प्रारूप का अध्ययन कर लिया है। यदि इसके बारे में सदस्य कुछ कहना चाहें, तो कह सकते हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः उसी के संदर्भ में मैं बोलना चाहता हूँ। वास्तव में मैं भी इस व्यवस्था के प्रश्न को उठाना चाहता था, परन्तु श्री नजीरुद्दीन भाग्यशाली रहे कि उन्होंने यह प्रश्न उठाया। अतः इस प्रश्न पर मुझे कुछ कहना है।

श्री मोहन लाल गौतम (यू.पी.ः सामान्य)ः प्रक्रिया नियमों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि सदन में एक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद कोई व्यवस्था का प्रश्न उठाया जाए। माननीय सदस्य से अनुरोध है कि वे मुझे बताएं कि किस नियम के अंतर्गत ऐसा किया जा रहा है ताकि मैं देख सकूं कि व्यवस्था का प्रश्न नियमानुसार उठाया जा रहा है।

माननीय सभापतिः ये बहुत स्पष्ट मुद्दे हैं जिन पर बहस करने की आवश्यकता नहीं है। यदि मुद्दे की स्पष्टता पर मतभेद हो, तो हमें उस मुद्दे की विषय-वस्तु पर ध्यान देना चाहिए न कि तकनीकी बातों पर समय बर्बाद किया जाए। यदि लोग संहिता विरुद्ध है, तो यह विषय-वस्तु की बात है। यदि वे इसका समर्थन करते हैं, तो यह भी विषय-वस्तु की बात है। परन्तु, हमें तकनीकी बातों पर सदन का समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।

इसके बाद, व्यवस्था का जो प्रश्न उठाया गया था, उसमें कहा गया था कि जो विधेयक समिति को भेजा गया था, यह वह नहीं था, जिस पर समिति ने विचार किया और रिपोर्ट किसी अन्य पर आधारित है। यह था व्यवस्था का प्रश्न। और उस व्यवस्था के प्रश्न पर बहस हुई। यदि श्री भार्गव सही बताए, तो मामला भिन्न होगा और मेरा विश्वास है कि और जो कुछ श्री नजीरुद्दीन अहमद ने कहा है, उसका उत्तर मिल जाएगा। क्या वे अन्य तथ्यों की ओर भी मेरा ध्यान आकर्षित करेंगे।

श्री जसपतराय कपूरः महोदय, क्या मैं आप से व्यवस्था का प्रश्न आपके समक्ष रखने का अनुरोध कर सकता हूँ। इस प्रश्न का समाधान इस सत्र में करना इस सदन की सक्षमता से संबंधित है कि क्या श्री नजीरुद्दीन द्वारा उठाये गये प्रश्न पर इस सत्र में चर्चा होगी? यदि मेरा व्यवस्था का प्रश्न स्वीकार हो जाता है, तो इस सत्र में इस विषय पर चर्चा समाप्त हो जाएगी।