अनुभाग तीन - प्रवर समिति से वापस भेजे जाने के पश्चात् हिंदू संहिता पर की गई चर्चा (11 फरवरी, 1949 से 14 दिसम्बर, 1950 तक) - Page 514

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प्रश्न के बारे में मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या प्रवर समिति द्वारा एक विधेयक पर की गई कार्यवाही पर सदन में इस तरीके से कार्यवाही होनी चाहिए। हम रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं, परन्तु प्रवर समिति ने एक मामले में किस प्रकार कार्यवाही की, इस पर यह चर्चा संगत नहीं है और इस पर चर्चा करना समय की परम्परा नहीं है। अन्यथा, प्रत्येक प्रवर समिति को अपनी कार्यवाही की शब्दशः रिपोर्ट देनी पड़ेगी, ताकि इसके औचित्य की जांच को सके।

माननीय अध्यक्ष महोदयः व्यवस्था संबंधी विभिन्न प्रश्न उठाए गए हैं और उनके बारे में विस्तार से कहा गया है। वर्तमान विषय के संबंध में यदि सदन द्वारा भेजे गए विधेयक पर प्रवर समिति ने बिल्कुल विचार नहीं किया। मैं पंडित भार्गव से कहना चाहूंगा कि उन्होंने जो कुछ कहा है उसके बावजूद भी इस पर आगे चर्चा नहीं होगी। आप इसे सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन कहें या प्रक्रिया का दुरुपयोग, संक्षेप में बहस इस बात पर पहुंची है कि समिति ने एक प्रति स्थापित विधेयक पर विचार किया, इसने मूल विधेयक पर विचार नहीं किया और यह निष्कर्ष प्रवर समिति की रिपोर्ट में की गई कुछ टिप्पणियों पर आधारित हैµअल्पमत अथवा बहुमत की रिपोर्टµऔर इसलिए उन्होंने अनुमान लगाया- अधिक सत्यता के साथ कहाµइन दस्तावेजों के आधार पर मूल विधेयक पर विचार नहीं किया गया। संक्षेप में यह व्यवस्था का प्रश्न है। विशेषाधिकार उल्लंघन या प्रक्रिया के दुरुपयोग का प्रश्न तब उठता है जब समिति के बारे में आपका निष्कर्ष सही हो परन्तु यदि हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि आपकी आशंका निर्मूल है, और प्रवर समिति दोषी नहीं है, तो किसी व्याभिचार उल्लंघन या प्रक्रिया के दुरुपयोग का प्रश्न नहीं उठता है। मैं सदस्यों को आश्वासन देता हूँ कि माननीय सदस्य प्रवर समिति की रिपोर्ट को पढ़कर जो मुद्दे उठाने जा रहे हैं, मैंने उनका ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है और इसके बारे में मेरा अपना निष्कर्ष है। मैं पूरे मामले को संक्षेप में बताता हूँ। इस पर विचार करने के बाद निर्णय किया जाएगा। संसद का और मेरा समय बर्बाद न किया जाए। इस मामले में मैं यही समझता हूँ। ( कुछ माननीय सदस्यः ठीक है महोदय)। इस विधेयक पर चर्चा आज समाप्त नहीं कर रहे हैं। हम स्थिति को स्पष्ट करेंगे और इस पर और बहस नहीं होगी, मैं शायद...

पंडित ठाकुर दास भार्गवः आपकी बात सुनने के बाद मैं मामले पर और बहस नहीं करना चाहता कि कार्य कैसा हो रहा है। परन्तु मैं आपके सामने कुछ विनिर्णय रखना चाहता हूँ, जिनसे पता चलता है कि प्रवर समिति से परे यह विधेयक स्वरूप लेता है जो आया विधेयक पूर्णतः अनुचित, अवैध तथा समिति की पूरी रिपोर्ट अमान्य करता है और सदन के समक्ष चर्चा के लिए कोई रिपोर्ट नहीं है। यही मेरा कहना है। यदि आप अनुमति दें तो मैं कुछ विनिर्णय प्रस्तुत करना चाहता हूँ।