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पूर्वाह्न 11ः45 बजे
ऽहिंदू संहिता µ जारी....
माननीय उपाध्यक्षः हम हिंदू संहिता पर विचार करेंगे।
श्री जसपतराय कपूर (यू.पी.ः सामान्य)ः मैं एक व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाहता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः खड़े हुए।
माननीय उपाध्यक्षः श्री कपूर द्वारा व्यवस्था का एक प्रश्न उठाया गया है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः मैं उसी के विषय में बोल रहा था, महोदय यहां आर्डर पेपर में 16 विभिन्न प्रस्ताव दिए गए हैं। इनमें से कुछ व्यवस्था के प्रश्न हैं और कुछ मूल प्रस्ताव हैं। प्रस्ताव पर बोलने से पहले मैं उन पर स्पष्टीकरण देना चाहता हूँ। क्योंकि, मेरे मित्र कुछ कहना चाहता हैं, तो उन्हें बोलने दें।
माननीय उपाध्यक्षः हम उनका व्यवस्था का प्रश्न सुनते हैं।
श्री जसपतराय कपूरः महोदय, जब पिछली बार प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी, तो मैं एक व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाहता था। तब अध्यक्ष महोदय ने कहा था कि जब तक श्री नजीरुद्दीन अहमद के व्यवस्था के प्रश्न पर चर्चा समाप्त नहीं हो जाती, आप प्रतीक्षा करें। उस व्यवस्था के प्रश्न पर उस दिन ठीक पांच बजे चर्चा समाप्त हुई। उसके बाद सदन की बैठक स्थगित हो गई। मैं आशा करता हूँ कि आप आज मुझे व्यवस्था का प्रश्न उठाने की अनुमति देंगे। परन्तु यह प्रश्न उठाने से पहले मैं सदन को आश्वासन देता हूँ कि मेरा उद्देश्यख्...,
माननीय उपाध्यक्षः क्या माननीय सदस्य अपने व्यवस्था के प्रश्न के बारे में कुछ कहेंगे। क्षमा मांगने की या बहस करने की कोई आवश्यकता नहीं हैं। मैं व्यवस्था का प्रश्न सुनना चाहता हूँ।
श्री जसपतराय कपूरः मेरा व्यवस्था का प्रश्न सबसे पहले सदन के सदस्यों के अधिकारों और विशेषाधिकार से संबंधित है और दूसरे इस सदन द्वारा हिंदू संहिता जैसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद विधेयक पर विचार करना उचित है, जबकि बड़ी संख्या में सदस्य इसमें भाग नहीं ले रहे हैं और न ही वे भाग ले सकते हैं। वे ऐसा अपने व्यक्तिगत
ऽविधानसभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड 2, भाग II, 24 फरवरी, 1949, पृष्ठ 821-52